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________________ जिन श्रीअमम | पर्वतस्याम्बा पूर्णकामेयमर्थिनी // 15 // तदुराग्रहदैन्यात्तिसंक्रान्त्या विप्रतीपधीः। वसुर्ध्यात्वेति संमोहात्सादरं तामदोऽवदत् // 16 // | मा विषीद प्रसीदाम्ब ! भव पूर्णमनोरथा / स्वस्त्यस्तु तव पुत्राय मम सत्यव्ययादपि // 17 / / तद्गिरामृतवृष्ट्येव प्ररूढपुलकान्तरा। चरित्रम् असत्य प्र॥१३८॥ | सानन्दा साऽगमद् गेहं सर्वमाख्याच्च सूनवे // 18 // मात्रा सत्यतया चान्तःकृतावष्टम्भनिभरौ / पर्वतो नारदश्चोभौ विवादार्थमुप काशनाद् Hotel स्थितौ // 19 // सर्वशासाधिपारीणा अरीणाः शान्दिवर्गनि ! महाकुलीना मध्यस्था धर्मशीयविशारदाः // 20 // पार्षदाः समवेयुश्च * वसोर्विनाशः वामिनः सत्यवादिनः / वादिनो सदसत्पक्षपरीक्षानिकपोपलाः // 21 / / युग्मम् / / अध्यासामास चाकाशस्फटिकोपलमूर्द्धगम् / सभा| पतिर्वसुः पीठं प्रत्यगद्रिमिवार्यमा // 22 // ततः खां स्वामजव्याख्यामाख्यतामेत्य पर्षदि / नारदः पर्वतश्चोभौ सभ्याध्यक्षं तदोद्धतौ | // 23 // द्वयोस्तृतीयस्वं राजन्नावयोः पठतोरभूः / अतः साक्ष्यसि तां व्याख्यां सत्यां ब्रूहि गुरूदिताम् // 24 // धर्माधिकारिभिवृद्धैरथेत्यूचे वसुस्तदा / अयमातिष्ठिते वादस्तत्वज्ञे त्वयि भूपतौ // 25 // ततस्त्वमनयोः साक्षी पक्षयोरिव चन्द्रमाः / कीर्तिश्रीलग्नकं सत्यव्रतं मन्याः स्वमव्ययम् // 26 // सत्याद् दिव्यानि वर्त्तन्ते घटादीन्यधिभूतलम् / सत्याद्देवाः प्रसीदन्ति मन्त्राः सिद्ध्यन्ति सत्यतः // 27 // सत्यादुदेति सूर्योऽयं सत्यावर्षन्ति वारिदाः / विश्वाधारा निराधारा सत्यात्तिष्ठति भूरियम् // 28 // मध्यमाल्लोकपालात्वत्सत्ये सर्ग-४ लोकः प्रवर्तते / तन्महीश! विवादेऽस्मिन् सत्यमाचक्ष्व मा मुहः // 29 / / अनाकणितकेनेव तद्वाचमचमत्य च / विश्वैकजांघिकी| सत्यप्रसिद्धिं स्वामुपेक्ष्य च // 30 // अनूदिवानजव्याख्या गुरूक्तामेव पर्वतः / इति साक्ष्य वसुश्चक्रे क्रुद्धं देवं हि दुधिये // 31 // // 138 // देवतास्तदसत्यैधःसमिद्धक्रोधवन्हयः / आकाशस्फटिकशिलां द्रागकुर्वत चूर्णसात् // 32 // वसुः पपात मेदिन्यां विश्रस्तहरिविष्टरः / मिथ्यावाचामधःपात इहापीति वदन्निव // 33 / / कूटसाक्ष्यकुधा वं निध्यातोप्यसि पाप्मने / निन्दनिति वसुं भूम्ना नारदः स्वा
SR No.600399
Book TitleBhavi Jineshwar Amamswami Charitra Mahakavya Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMuniratnasuri, Vijaykumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1942
Total Pages306
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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