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________________ दीणा पुन्नथालं, ठावइ पुरिसं च तस्स तडे || १९३ ॥ वरदिन्नपासयकरो, सो पुरिसो भणइ जो ममं जिणइ । सो लेउ थालयं, जित्तो मे देउ दीणारं ॥ १९४ ॥ चाणकेणं चिंतिय-मेवं कोसो पभूयकालेण । पूरिज्जइ ता अन्नं, इत्थ उवायं करेमि अहं ॥ १९५ ॥ पाएमि पवरमज्जै रिद्धिसमिद्धे कुटुंबिए सब्वे । जेण नियगेहलच्छी, सन्भाव मे कहंति जओ ॥ १९६ ।। कुवियस्स आउरस्स य, बसणं पत्तस्स रागपत्तस्स । मत्तस्स मरंतस्स य, सम्भावा पायडा हुंति ॥ १९७ ॥ इय निच्छिय चाणको, आहविय कुटुंबिए नियावासे । भुंजाविऊण पायइ, ते मज्जं अपणो न पुणो ।। १९८ ।। तो गाणहसणनच्चण-पमुहं उक्तित्तचिट्टियं नाउं । चाणक्को तम्मज्झे, तालं दाऊण इय भणइ ॥ १९९ ।। दो धाउरत्तवत्थे, कंचणमयकुंडिया दिंडं च । नरनाहो वसवत्ती, होलं वाएह मे इत्थ ॥ २००॥ तत्तो होलावज्जे, पत्राइए कोलिएहि मत्तेहिं । उक्खित्तकरो एगो, कुंटुंबिओ भणइ उच्चसरं ।। २०१ ॥ जोयणसहस्सगमणे, हस्थिस्स पर पर्यमि लीलाए । पूरेमि कणयलवखं, होलं वाएह मे इत्थ । २०२ ।। अवरो तिलाढयंमी, वविए उत्पन्नए पडितिलंपि । पूरेमि कणयलक्ख, होलं वाह मे इत्थ ॥ २०३ ॥ अन्नो भणइ गिरिनई - पूरं गोमक्खणेण संभामि । एगदिणुप्पन्नेर्ण, होलं वारह मेइत्थ ॥ २०४ ॥ अन्नो य किसोराण, इगदिणजायाण खंधकेसेहिं । छाएमि नयरमेयं, होलं वाएह मे इत्थ ॥ २०५ ॥ आहन्नो दो साली - रयणे मह गद्दही पमूई य। निश्च्चं छिन्नपरूढा, होलं वाएह मे इत्थ ॥ २०६॥ इय नाउं तब्भावं, चाणको ते कुटुंबिए सव्वे । विगयमए आहविडं, जहारिहं मग्गए एवं ।। २०७ ।। इग जोयणगामी - गयपयमाणे मग्गए कणयलक्खे | एगं अवरं च पुणो, एगतिलुब्भवतिलपमाणे ॥ २०८ ॥ अवरे एगाहभवे, नवणीयकिसोरए य पडिमास । कुद्वार
SR No.600381
Book TitleDharm vidhi Prakaranam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorUdaysinhsuri, Shreeprabhsuri
PublisherHansvijayji Library
Publication Year1924
Total Pages320
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size24 MB
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