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________________ श्री प्रवचन परीक्षा ॥३४९॥ 0%CHOICE SONGHONEYONGHOGY सुत्तत्थरयणभरिए० पडिसिद्धाणं करणे ० अन्नाणतिमिरसूरो० कुतः सीमे० तो णं सावगस्स ग्रामो नास्ति मूअं हुंकारं वा बाढक्कार० संहिआ य पयं चैव० चारि पुरिसजाया पं. तं. हुआ हु बसणं पत्तो ओसनोऽवि विहारे० पंचाहिँ ठाणेहिं कप्पति ० आयरियउवज्झाएत्ति० खेलं केलि कलिं कला ० धम्मं चरमाणस्स पंच० २४७ २४८ २४८ २४८ काया गणेय राया इकस्स कओ धम्मो० गुरुपरिवारो गच्छो० पं० ठा० क० णिग्गंथाण वा० २४९ जावइया उस्सग्गा ताव० २४९ द्वन्द्वान्ते श्रूयमाणं पदं० २४९ चउहिं ठाणेहिं जीवा २४९ मजं विसय कसाया० २४२ तिष्णोऽहिसि अण्णवं ० २४९ २५० २५० २५१ २६० सम्मद्दिठ्ठी जीवो० कडसा महओवि ० अहो जिणेहिं० दुविहे धम्मे पनत्ते० सिंचइ खरइ जमत्थं ० २६१ | सु० सुठिअवावित्तओ० २६८ साक्षिपाठ २६१ | जो सुत्ताभिपाओ सो अत्थो० २६८ सूचा २६ १ | आणाइ तो आणाइ संजमो० २६८ २६१ आणानिदेसकरे० २६८ २६२ | ज्ञानदर्शनचारित्राणि० २६२ | सावञ्जजोगपरिवञ्जणाइ २६२ |तिविहा आराहणा० २६४ एवमइक्कमेऽवि वइकमेऽवि० २६४ आहाकम्मामंतण २६६ तिहिं ठाणेहिं देवे परि० २६९ २६९ २६९ २६९ २६९ २७१ २७१ २६७ दस नक्खत्ता नाणस्स ० २६७ | उदयकूखयक्खओवसमो० २७१ २६७ दो दिसाओ अभिगिज्झ० २७२, २७३ २६८ | पुण्वाहो उ उत्तरनुहो० २७२ OGONDONGHORONGHONGK ॥ ३४९ ॥
SR No.600378
Book TitlePravachan Pariksha Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDharmsagar
PublisherRushabhdev Kesarimal Shwetambar Samstha
Publication Year1937
Total Pages356
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size30 MB
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