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________________ 27 तेवीस सागराई ते पुत्ते बलसिरी सिं सुच्चा सपुजाणं तो णाणदंसणसमग्गो तो बंदिऊण पाए तोसिआ परिसा सवा इक तुच्छसरीरगं से तं ठाणं सायं वासं तं देहइ मिआपुत्ते तं पासिऊणमेनंत तं पासिऊण संवेगं तं पुनेण कयानुरागं तिम्मापिअरो तं तिम्मापिअरो .... .... .... .... .... .... .... .... **** ३६ - २३२ तं लयं सबसो छित्ता १९-२ तंसि णाहो अणाहाणं ५-२९ थ. ८-३ थलेसु बी आई व पति कासगा थावरं जंगमं चैव ९-६० २३-८९ थेरे गणहरे गग्गे १३-२५ २३-८४ १९-६ १२-४ २१-९ १३-१५ १९ - २४ १९-७५ द. दण रहनेमिं तं दवग्गिणा जहा रणे दवदवस चर दिओ खेनओ चैव 19 ... दबओ चक्खुमा पेहे दषाणं सबभावा .... .... **** .... ... .... .... .... २३- ४६ दवे खित्ते काले २०-५६ १२-१२ ६-६ २७-१ २२- ३९ १४ - ४२ १७-८ ३०-२४ ३४-४३ ३६-५१ ३६-१०२ ..... ३६-२२४ ..... १८-४४ ३४-४१ .... दसउदही पलिअमसंख दस चैव नपुंमेसु दस चेव सहस्साई दस चैव सागराई दसणरजं मुइअं दसवास सहरसाई दसवास सहरसाई दसवास सहस्सा ई दससागरोवमाऊ २४-६ ३६-३ २४-७ दाराणि य मुआ चेव २८-२४ दासा दसणे आसि .... .... **** .... दसहा भवणवासी दाणे लाभ अ भोगे अ ..... .... ३४-४८ ३४-५३ ३६-१६३ ३६-२०३ ३३-१५ १८-१४ १३-६ **** UTR-1
SR No.600338
Book TitleUttaradhyayanam Sutram Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorChandraguptasuri
PublisherAnekant Prakashan Jain Religious Trust
Publication Year2010
Total Pages444
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_uttaradhyayan
File Size33 MB
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