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________________ जाग ॥ जाणे पेहरता गया । सहूनर नारी भाग ॥ १६ ॥ शाख चूले चडियो । रोटी चक लोटे जोय । धरी थाल परुसी । जीमण हार न कोय ॥१७॥ इम चमत्कार बहु । जोवता सर्व जाय । राजमहल समीपे आया दोनों चलाय ॥ १८ ॥ पडया पहरायत नाभ शस्त्र वहूतिण ठाम ॥ आगे कचेरीमें । दफतर विखयों तमाम ॥ १९॥ मेहल ऊपर | चडिया। पेखंता आवास ॥ सहू पडी सामग्री। राजभोगसी खास ॥ २०॥ अति आश्चर्य में ।।धरता । चडिया आगल जोय ॥ कहे ऋषि अमोलख । ढाल दश यह होय ॥ २१ ॥8॥ |॥दोहा॥ कन्या रंभा सरीखी । शृंगारी शोभित ॥ गलकर द्रष्टी भूपरे । बैठी सुस्ते चित K॥१॥ देख मदन आश्चर्य भयो । सुरी नारी किन्नरी एय | सुन्य ग्राममें एकली। किण |K कारण ए रेय ॥ २॥ कन्या पद मनुष्यना । सुणने ऊंची जोय ॥ इच्छित आया पेखने। | हर्षित अतिही होय ॥ ३ ॥ उत्सहाये उभी रही। जोडी दोनों हाथ ॥ लज्जित नयण र # अधो करी । मदनके सामे आत ॥ ४ ॥ आश्चर्य चकित मदन हुवो । मोहाणो अतिमन ॥ जेह ए रंभा परणसी । ते नर जगमें धन्य ॥५॥ ढाल ११ मी ॥ राम आया जमाना | खोटा ॥ यह ॥ भाइ मदन पुण्यवंत भारी ॥ जहां जावे तहां पावे सत्कारीरे ॥ भाइ ॥७॥ मदन पास ते बाइ आइ ॥ नीची नमीने इम उच्चारीरे ॥ भाइ ॥१॥ मदनेश्वरजी भला पधार्या । पूरी आस हमारीरे ॥ भाइ ॥२॥ अषाढ मेघ ज्यूं मारग जोती । ते
SR No.600299
Book TitleMadan Shreshthi Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherSukhlal Dagduram Vakhari
Publication Year1942
Total Pages304
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size22 MB
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