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________________ विशेषावश्यक गाथा: श्रीमलधा-3|पंचण्डं पंच सया अद्भुट्ठसया य होंति दोण्ह गणा । दोण्हं तु जुवलयाणं, तिसो तिसतो हवइ गच्छो । २००३ ।। ५९७ ॥ यतिदिष्टादभवणवइवाणमंतरजोइसवासी विमाणवासी य । सब्बिड्डीए सपरिसा, कासी नाणुप्पयामाहमं ॥ २००४ ॥ ॥३४॥ दळूण कीरमाणी, महिमं देवेहिं जिणवरिंदस्स । अह एइ अहंमाणी अमरसिओ इंदभूइत्ति ।। ३००५ ।। ५९८॥ (मोत्तूण ममं लोगो किं वच्चइ एस) तस्स पामूलं । अन्नोवि जाणइ मए ठियंमि कतोच्चयं एयं? ॥ २००६ ॥ बच्चेज्ज व मुक्खजणो, देवा कहऽणेण विम्हयं नीया? । वंदंति संथुणंति य, जेणं सब्वण्णुबुद्धीए ॥ २०७५ अहवा जारिसओच्चिय सो नाणी तारिसा सुरा तेऽवि ॥ २००८॥ अणुसरिसो संजोगो, गामणडाणं च मुक्खाणं ॥ २००९ ॥ काउं हयप्पयावं, पुरतो देवाण दाणवाणं च ॥ २०१०॥ आभट्ठो य जिणणं जाइजरामरणविप्पमुक्केण । नामेण य गोत्तण य, सव्वण्णू सव्वदरिसणिं ॥ २०११ ॥ ५९९ ॥ हे इंदभूतिगोतम, सागयमुत्ते जिणेण चिंतेइ । नामपि मे वियाणइ, अहवा को मं न याणाइ? ॥ २०१२॥ | जइ वा हिययगयं मे, संसयमुण्णेज्ज जइ व छिन्नज्जा । तो होज्ज विम्हओ मे, इय चिंतेंतो पुणो भणिओ॥२०१३ किं मन्ने अस्थि जीवो उयाहु नात्यात्त संसओ तुज्झ । वेयपयाण य अत्थं ण याणसी तेसिमो अत्थो । २०१४ ॥ मगहा गोबरगामे जाया तिण्णेव गोयमसगोत्ता। कोल्लागसण्णिवसे, जाओ वियत्तो सुहम्मो य ॥ १४९२ ॥ ६४३ ॥ | मोरियसण्णिवेसे दो भायरो मंडिमोरिया जाया । अयलो य कोसलाए, मिहिलाए अकंपिओ जाओ ॥ २४९३ ॥ ६४४ ॥ SCHOSSAKAUSK ॥३४॥ *****
SR No.600286
Book TitleNandisutrasya Churni
Original Sutra AuthorRushabhdevji Keshrimalji Shwetambar Samstha
Author
PublisherRushabhdevji Keshrimalji Shwetambar Samstha
Publication Year1928
Total Pages238
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_nandisutra
File Size19 MB
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