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बागमो.
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ISI कारवजणं बंमं। अव्वावारी आसवदारं तत्तत्यसदहणं | पंचदसी चोइसित्ति त णेव । पडिकमणत्यं वुत्तं अभिम्गहे जे II जयसोमः
॥१३॥ विट्टलिया बंभणिया तुरुक्किमइसेइ इइ कओ सच्चो । न वच्छरियं ॥२१॥ आयरिएहिं सद्धिं न सिया वसही || सिक्खा द्वारककृति
RI आभाणओ तए ज पुष्णिमपक्खि ठर्वतेण ॥१४॥ पुण्णिम- | सिया तो उभयं । अइरित्ता लोयभिग्गहकरणे तिहिदुगे सन्दोहे
दिवसे पक्खी जइ तो किं ताओ तिणि अक्खाया। पाढो ॥२२॥ किमभयदेवा आयरणं न य मभंति पक्खिए चउमासीपव्वनियया बिइयंगे सीलसरीहिं ॥१५॥ नहि जइ ते । मन्नति तो तिहिदुर्ग किं न सकप्पणा सेया ॥२३॥ । सव्वामावासा महकल्लाणगवई तओ पक्खी । जइ न चउद्द- तित्योगालियवयणं पक्खियदियहमि चउविहो संघो । गच्छ- II सिदिवसे सड्ढाणं तो न तप्पोसो ॥१६॥ अष्णदिण- विसेसे रूढ़ चउमासिदिणे य पक्खिययं ॥२४॥ एवं पोसहस्स खेवे पजोसणविहाणेऽवि। पोसहकरणे पावं. च तिणि चउमासियाणि पुचि कया उ रागासु ? तत्तग्गंथेहिं कंथुत्ती ॥१७॥ सूरियपन्नचीए अणुसरणे आगमवयणाऽऽइण्णा चउद्दसीएत्ति सयलंसं ॥२५॥ पक्खियस्स नणु पक्खी। राउठ्ठितिहते पक्वंतो णेव जयसोमो सगणग्गहगहगत्थो विविहसत्थाणं । पाढा कय- 4 संज्झाए ॥१८॥ दिवसस्स य राईए वासस्स य अंतिमे हि मजायादंसीति कहं वियाणाइ ॥२६।। अवयरणं सव्वत्थ वि DI | नणु भागे । पडिकमणा कायव्या देसियराईयवच्छरिया॥१९॥ कयमज्जायत्थमुइयमवि नेक्खे। जयसोमो रविसरिसं INI
न य पक्विएण चउद्दसी वष्णिया कहिंवि सत्थे । परिहारो | कहमिहरा बेइ किइकालं ॥२७॥ किं न तर्हि चिय IN दोण्हमेव पक्खी कि चोदसी णेव ॥२०॥ पंचासगस्स वयणं | दिडं जावज्जीवाणणुव्वयाणित्ति । दिढे धारणकालो न
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