________________
INN
ईर्याद्वा
भागमो. बारककृतिसन्दोहे
पञ्चाशिका
॥२२२।।
सणओ कुद्धो समुदाओ गालिपउणो ते ॥३५।। मुणिसुंदर- परावत्तिओ मोहा ? ॥४३॥ न य खरयरुत्ति णाम पुचि गणवइमुह आयरिया जिणपडिमपूयाए। रोहगमणंतसंसार- बारससईइ कत्थवि य । न य साइ सहसवरिसे पत्तणे दुल्लजगं फुडतया विति ॥३६॥ किं जाव य जिणदत्तो जाओ भोऽवि निवो ॥४४॥ सगतीसहिएक्कारससयंमि जिणवल्लताव रयस्सला वणिया। अणिययकाले जाया नेव य पडिमा हस्स वरभत्तो। णेमिकुमारो लिहति तग्गच्छं कुच्चपुरिजं न किं दिव्वा ॥३७॥ अन्ने आयरिया वा वियक्वणा सास- ॥४५॥ न य जिणवल्लभगणिणा सग्गंथे खरतरत्तमक्खायं । णाणुगा वा णो। जिणवल्लभकल्लाणगछक्कं व निसिद्धमेयपि अइखरजम्मं को वा अल्लियइ सयंमिसंतं वा ॥४६॥ तवगण॥३८॥ मिच्छेहिता रक्षणमसकमजाण भावि गुरुणा। नाम सक्खं कम्मग्गंथस्स वित्तीइ आह । सिरिदेविंदायरिया लोभा उवगरणाणं पञ्चजंतीण बाहुल्ला ॥३९॥ तकालमत्तः जे तक्कालंमि सहगामी ॥४७॥ न जिणेसरबुद्धिस मुत्तो जुवइपवजानिसेह तप्पभवो। न पराभवोऽत्थ गच्छे आयरिया खरयरत्तमक्खंति । जिणचंदा जिणभद्दा गुणचंदा विक्कमपुरियन्नगच्छव्व ॥४०॥ जिणचंदणामधारी गेहेणदित्त- अ उवज्झाया ॥४८॥ नाभयदेवायरिया न वद्धमाणा पए मायरंतो उ । मजउं जं जिणवल्लहू कहेइंतं कुच्चपुरिज्जं ॥४१॥ ठिया तेसि । जिणवल्लभजिणदत्ता वि य न अक्खंति खरयरयं न य कत्थइ गंथेसं पभावया सूरिणो अभयदेवा। खरतर- ॥ ४९ ॥ जिणदत्तावच्चेहि कल्लाणगछक्कपमुहअविहीसं । गच्छ आह गट्टे जिणदत्तकयमेयं ॥४२॥ पट्टावलीइ पाढो निरएहि तट्ठावणहेउं सव्वे खरा ठविया ॥५०॥ खरयरनाम पडिकमणदीवियाइ तह पाढो । जिणचंदजोगधारेहि न कि सत्थे न संसियं कत्थई महप्पस्स । णामं तवृत्ति तवगुणस
१२२२॥