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नमिविन
मिव
श्रीदे. चैत्यश्रीधर्म० संघा
चारविघौ ॥९१॥
suminimum
पणमामि भावसारं छउमत्थे तिमुवि कालेसु॥१॥"त्ति ॥ नमिविनमिसंबंधश्चायं-इह भरहे सजियघणुहसंनिहे अत्थि कोसला नयरी । नासच्चजुआ दिप्पंतसुरयणा अमरनयरिब ॥ १॥ सालासु तंतुवायाण जत्थ वसणुब्भवो तह तरूसु । छायाएँ परावत्तो मयणमि य मारसहो उ ॥२॥ मग्गणसदो बाणेसु वालहत्थीसु तह कलहसदो । रयणेसु वयरसदो न कयावि हु नायरजणस्स | | ||३|| आखंडलकरयलकलियकणयकलसकयरजअहिसेओ। सिरिरिसहो मंतेसुव पणवो पढमो निवेसु निवो ॥४॥ दंसियनिस्सेस| कला विजाविनाणसिप्पकम्मस्स । मंतिपरिकप्पणा रायनीइमित्तं चिय पहुस्स ।।५।। तिहुयणभवणोयरविवरवत्तिसत्ताण रक्खणखमस्स । सेवगपणयावेकखाइ अंगरक्खा ण य समिक्खा ॥६॥ सयलामरअसुरनरिंदविंदसेवियपयारविंदस्स। हरिकरिरहवरभडनिवहसंगहो रअविइमित्तं ॥७॥ तिहुअणपिउणो पहुगो सुहमाणाडंबरं पहरणाई । असिचकचावसरसिल्लभल्लवावल्लपमुहाई ॥८॥ कुमरतं वीसं पुवलक्ख तेवद्धि तय इय रज। पालिय तओ वियाणिय दिक्खासमयं नियं सामी ।।९।। सामंताइसमक्खं जा भरहं नियपए ठवेइ तहा । पाहुबलिपमुहकुमराणवि भइउं देइ देससयं ॥ १०॥ ताव सुदिट्ठी बंभंतरिट्ठपयरिंटुकिण्डराइंतो। ईसाणाइविमाणेसु अट्ठअपराउ लोयंता ॥११॥ अचिश्य अचीमालीरविरोयण३पभंकरे४य चंदामे ५। सूराभेदै सुक्कामे ७ सुपइट्ट८ रिढे ९ नव विमाणा ॥१२॥ सारस्सयरमाइचा २ वण्ही ३ वरुण ४ गद्दतोय ५ तुसिया य ६। अब्बाहा ७ अग्गिचा ८ रिद्वमिहा९इंति इय | संखा ॥ १३ ।। दुदुदुतिसु पुढो सगहिय सगसय चउदस सहस्स चउदहिया । सत्तहिया सगसहसा नवुत्तरा नव सया कमसो ॥१४॥ ते वेयालियकप्पा नियनियपरिवारिणो कयंजलिणो । बुज्झाहि नाह ! तित्थं पयह जगजियहिअट्ठाय ॥१५॥ एए देवनिकाया तत्थ य दुसु आइमेसु सत्त सया। दुसु चउदससहसा दुसु सहस तिसु नव सया अमरा ॥१६॥ भत्तिम्भरनमियसिररइअंजली ते
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