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________________ स्वोपन हात श्लो. ३० ॥९६ प्रतिमा | कज्जति ? एवं एते जस्स जं समयं जं देसणं जं पदेसेण य चत्तारि दंडगा णेयव्या। जहा नेरइयाणं तहा सव्वदेवाणं णेयव्वं, इतकम् . जाव वेमाणियाणं, । तथा पाणाइवायविरयस्स णं भंते ! जीवस्स किं आरंभिया किरिया कन्जति ? जाव मिच्छादसणवत्तिया किरिया कज्जति ?, गो० ! पाणाइवायविरयस्स जीवस्स आरंभिया किरिया सिय कज्जति सिय णो कज्जति । पाणाइवायविरयस्स णं भंते ! जीवस्स पारिग्गहिया किरिया कज्जति ? णो इणठे समठे। पाणाइवायविरयस्स णं भंते ! जीवस्स मायावत्तिया किरिया कज्जति ?, गो० ! सियकज्जति सिय णो कज्जति । पाणाइवायविरयस्स णं भंते ! जीवस्स अपच्चरकाणवत्तिया किरिया कज्जति,? गो०! नोइणहे समठे। मिच्छादसणवत्तिआए पुच्छा, गो०! णो इण समठे, एवं पाणाइवायविरयस्स मणूसस्स वि, एवं जाव मायामोसविरयस्स जीवस्स मणूसस्स य। मिच्छादसणसल्लविरयस्सणं भंते! जीवस्त किं आरंभिया किरिया कज्जइ? जाव मिच्छादसणवत्तिया किरिया कज्जइ ?, गो० ! मिच्छादसणसल्लविरयस्स जीवस्स आरंभिया किरिया सिय कज्जति सिय नो कज्जति, एवं जाव अपञ्चरकाणकिरिया मिच्छादसणवत्तिया किरिया णोकज्जति, मिच्छादसणसल्लविरयस्स णं भंते ! नेरइयस्स किं आरंभिया किरिया कज्जति? जाव मिच्छादसणवतिया किरिया कज्जइ ? गो० ! आरंभिया किरिया कज्जइ जाव अपच्चरकाण किरिया कज्जइ मिच्छादसणवत्तिया किरिया णो कज्जति, एवं जाव थणियकुमारस्स । मिच्छादसणसल्लविरयस्स णं भंते ! पंचिंदियतिरिक्खजोणियस्स एवामेव पुच्छा, गो० ! आरंभिया किरिया कजति जाव मायावत्तिया किरिया कज्जति अपच्चरकाणकिरिया सिय कन्जति सियणो कज्जति । मिच्छादसणवत्तिया किरिया णं कज्जति मणसस्स जहा जीवस्स । वाणमंतरजोइसियवेमाणियाणं, जहा नेरइअस्स, एतासिणं भंते ! आरंभिआणं जाव मिच्छादंसणवत्तिआणय कयरे २
SR No.600277
Book TitlePratima Shatak Granth
Original Sutra AuthorPratapvijay
Author
PublisherMuktikamal Jain Mohan Mala
Publication Year
Total Pages320
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size24 MB
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