SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 275
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ॥६८१॥ गुणनिहिम्मि ।।१५४॥ परिहासतोसपंडियकहाहिं सुहमच्छिऊण बहुदियहे । पीहिययदुक्खभीरू तहावि गमणूसुओ जाओ ॥१५५।। भणिओ य तेण राया तुह पाया देव! दुच्चया अम्हं । तहवि पियरो महंतं काहिति मणे असंतोसं ॥१५६।। सट्ठाणमओ जामो अणुजाणह राइणा तओ भणियं । पियदसणधणजसजीवियाण को लहइ पअत्ति ?।।१५७।। ता कुमर कि भणिजं तहावि जह संगमो पुणो होइ। सिग्घं चिय तह जत्तो कजो पीऊसवुद्धिसमो ।।१५८॥ सुविणेवि मा कुणेजसु देवीए कलावईए विसयम्मि । चितं, जओ न रयणं कस्सवि चिंताए अग्धेइ ।।१५९॥ जयसेणकुमारेणवि भणियं सचं ण अन्नहा एयं । जं पुण इह भणियव्वं ताए पुरावि भणियं तं ॥१६०।। नासगभूया तुम्हाणमप्पिया सव्वहावि तुन्भेहिं । एसा चितेयव्वा वसणे तह ऊसवे य सया ॥१६१॥ इय संभासपरो सो विरहग्गिकरालियंव रुयमाणि । संठाविउ कलावइमणुगम्मतो नरिदेण ।।१६।। कुमरो गंतुं लग्गो कमेण पत्तो य देवसालम्मि । दिट्ठा पियरी हिट्रेण साहिओ वइयरो सव्वो ।।१६३।। संखोवि य खोणिवई संपुन्नमणोरहो सह पियाए । तीए अपत्तविरहो भोए भोत्तुं समारद्धो ।।१६४॥ तीए अदंसणे हिययनिव्वुई न हु खणंपि पावेइ । नियजीवियंपि दिच्छइ अच्छइ सइ तकहक्खणिओ X ॥१६५॥ किं बहुणा । कजाई कुणइ अंगं चित्तं चिट्ठइ कलावई जत्थ । अंतेउरंपि सव्वं कलावईणामगं जायं ॥१६६॥ तह तीए तणुईए रन्नो रुद्ध विसालमवि हिययं । ओगास जह अण्णा पावइ थेवंपि नो तत्थ ॥१६७ । सा पुण न मुणइ वोत्तुं कयावि अलियं न यावि पेसुन्न । ईसावसं ण गच्छइ न यावि सोहग्गगव्वं च ॥१६८॥ जाणइ पियाई भणिउं जाणइ सव्वस्स उचियपडिवत्ति । जाणइ दुहिएसु दयं जाणइ परिपालिउ सोलं ॥१६९।। हयहियओ होइ णिवो ।।६८१।।
SR No.600269
Book TitleUpdeshpad Mahagranth Satik Part 02
Original Sutra AuthorJinendrasuri
Author
PublisherHarshpushpamrut Jain Granthmala
Publication Year1991
Total Pages448
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size8 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy