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संजाया ।।२७६ ।। बहुप उमनाहसेणा मुश्चंत विचित्तसत्यनिवहेण । छिन्नझयसत्तमउडा सरछिद्दतणू पराहुत्ता ॥ २७७॥ विहिया हरिपासगया भणति अव्वा ! महाबला एस। वज्जर हरी तुब्भे जइ निच्छियभासगा होउं ॥ २७८ ॥ अज वयं न उ पउमो हामा इय जुद्धमनुसरता । तो दुज्जयविजियविपक्खा सियकित्तिपयं परं हुंता || २७९ ॥ | पेच्छह अज न पउमा अहमेव भवामि भासिउं एवं वयणपवणेण पूरइ पंचजण्णं महासंखं ||२८० ।। ता तस्स रवेण हओ सुत्तो मत्तोव्व तक्खणा जाओ । तस्स बलस्स तिभागो तत्तो धणुदंडमामुलइ ॥ २ १|| तस्स पणुच्चाटंकार सद्दबहिरीकओ दुइजोवि । भागो जाव असत्थोदिट्ठो पउमा तओ नट्ठो ।। २८२ । तियनयरीए पविट्ठो दारपिहाणं च निट्ठरं विहियं । विहिया राहग गसजा नयरी कहो रहारूढो ।। २८३ ।। पागारपरिसरे गंतुमोय रेऊण नारसिंहतणू । सज्जो विउव्वई पायदद्दरं तह करेइ जहा ।।२८४।। टलटलियसुरालयसिहरभारभज्जंत मेइणीवीढा । खुब्भंत तुंगपासायमंडला सा पुरी जाया ।। २८५॥ कयपाण संसओ से किंचिदुवायं परं अपासंता । दुवयसुयाए समीवे गंतुं दीणाणणो भणइ ॥ २८६ ॥ तुह कुवियाए फलमिमं दिट्ठ एतो मए उ कि कज्जं । सा भणइ ममं घेत्तुं कण्हस्स पुणो समप्पेसु ॥ २८७ ।। सप्पुरिसाण अमरिसो पणामपज्जतओ जओ हाइ । एवं कयम्मि जीयं रज्जं च अगंजियं हाही ॥ २८८ ॥ व्हायनिवेसियसुइवत्थ जुवलओ दावई पुरो काउं । गंतु पाए अभिवंदिऊण एवं खमावेइ ।। २८९ ॥ । दिट्ठो परकमा तुम्हमेवमञ्चभुओ पुणो नाहं । एवं कयाइ काहं खमणिज्जा मेऽवराहोऽयं ।। २९० ।। निज्झाडियगव्वं सव्वहेव काउं स पउमनरनाहं । नियनयरीए विसज्जइ सयं रहारूढओ घेत्तुं ||२९१|| दुवयसुयं पंडुसुया जेणेव उवेइ तं समुप्पइय । नियनयर पर
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