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खन्नति सरंगसया पडंति सेल्लाइसत्थाई ।।६९॥ एवं गएस कइवयदिणेस् भग्गम्मि नंदसेण्णम्मि। धम्मदुवार नदी लग्गा मग्गिउ महमिमेहि ।।७०।। भणिओ एगरहेणं जं तीरसि नीणिउं तयं गिन्ह । तो सो दो भ जाओ एगं कणं धणं किंचि ॥७१।। गिण्हित्तु नगरदारे जा पत्तो कन्नगाए ता खित्ता। दिट्ठी वहलविलासा चंदे पिउणा अणुन्नाया | ॥७२॥ जाव रहम्मि विलग्गा खणेण सा चंदगुत्ततणयम्मि । ता भग्गा नव अरगा खणेण विमुहो स संजाओ ।।७३।। भणिओ तिदंडिणा मा निसेह एयं जओ नव जुगाई । पुरिसाणिमेत्थ काहंति फरतसत्ताणि ॥७४।। पुरमज्झमइगएहि ठवियं रजं च दोहिं भागेहि। नंदसूया विसभावियदेहा एगा नयणविसयं ॥७५॥ पव्वयगनिवस्स गया जाया इच्छा पणामिया तस्स । पगओ परिणयणविही जलणो पजालिओ ताहे ॥७६।। पारद्ध परियंचणमिमस्स पव्वइगराइणो जाहे। * तदेहगयं सहसा संकेतं तम्मि विसमुन्गं ॥७७।। भणइ वयंस ! मरिजा तप्पडियरणे कयायरो चंदो । जा जाओ ता | भिउडी दिंडिणा पयडिया भीमा ।।७८।। तक्खणमेव नियत्तो सो पुण पंचत्तमागओ ज्झत्ति । जायाणि तस्स दोण्णि वि रज्जाणि सुहाण सज्जाणि ।।७९॥ नंदपरिवारपुरिसा अलहंता चंदगुत्तओ वित्ति । लग्गा तत्थेव पुरे भुजो चारिक्यं काउं ।।८०।। मग्गइ चोरग्गाहं चाणको चिक्कणं परिभमंतो । नगरबहिं नलदाम कोलियमालोयए मासं ॥८॥ मुइंगलियाहि घरं कुणंतमेयाहि तस्स किल पुत्तो। डक्को सो परिकुद्धो तदुवरि मूलं निभालित्ता ॥८२।। तासि बिलं कुसीए खणेण निद्दहइ जलणदाणेण । एयादन्नो न खमो मञ्चितियसाहणे काइ ।।८३॥ एवं तिदंडिणा चितिऊण महाविओ निवसमीवे । कुसुमपुरारक्खपयं दिन्नं वीसासिया तेण ।।८४।। विसभायणदाणाओ सकुटुंबा विणिया, कयं
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