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श्रीउपदेन अट्टभिचउदसिदिणेसु सव्वाइं । मोत्तूण रजकज्जाइं पोसहं कुणइ उवउत्तो ॥१६॥ सिरिधम्मघोसनामा सूरी अच्चंतखी- अर्थशास्त्रशपदे Kणजंघबलो। ठाणंतरे विहारं काउँ असहो वसइ तत्थ ॥१७॥ साहुसमीवे पोसहकरणे रन्नो बहू अवाओत्ति ।
द्वा०कल्पतत्थेव रायभवणे पेासहदिवसेसु सो जाइ ।।१८।। भणिओ नियपरिवारो रन्ना, साहूण इंतजंताण । रयणीए दिवस
कमंत्रि
कथा म्मि य खलणा केणइ न कायव्वा ।।१९।। नाओ एस वइयरो तेणं दुट्ठाभिसंधिणा धणियं । रायसुएणं एए इत्थं ||१४४।। अनिवारियप्पसरा ॥२०॥ तो सेो वञ्जिय सेवावित्ति आवजिऊण गुरुचित्तं । अइदढसढत्तविणओवयारसारो गहियदि
क्खो ।।२१॥ भावसमणो व्व जाओ विणयरओ त्ति य पइट्ठियं तस्स । नामं बच्चइ कालो एवं छलचितणपरस्स ।।२२।। सूरीवि य गीयत्थे थिरव्वए नायजाइकुलसीले । साहू अप्पसहाए अप्पे निवभवणमाणेइ ॥२३॥ सो निश्चय चिय पगुणतमप्पणो आयरेण दंसेति । परमहिणवधम्मं भाविऊण वारेइ तं सूरी ॥२४।। अन्नम्मि दिणम्मि. मणी कन्जेण गिलाणपाहुणाईण । अच्चंतवाउलत्तं पत्ता पउणोय सो जाओ ॥२५॥ बहुदिवसदिक्खिओच्चिय ता सवि सहायओ गुरुहिं कओ । पत्ता रायकुलभंतरालसालाइ रयणिमुहे ॥२६ । पडिवन्नं पोसहमोसह व रोगाउरेण * नरवइणा । विहिओ तकालोचियववहारो वंदणाईओ ।।२७।। सुत्तेसु झाणसज्झायमाइकिच्चेण खीणदेहेस् । सरिनिवेस स पावो समुट्टिओ कढिया कत्ती ॥२८॥ सा पुव्वं चिय गूढा आसि रजोहरणमाइउवहिम्मि । दिन्ना कंठपएसे
रनो. नटो य संभंतो ॥२९।। सा रुहिरेण विलग्गा पासेणं बीयगेण निक्खमई । छिन्नो खणेण कंठो तो तीइ * अकुंठधाराए ।।३०।। उवचियतणुत्तणाओ रन्नो रुहिरछडाहि वियडाहिं । सित्तो देहे सूरी सहसा निक्खयं पत्तो
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॥१४४॥