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________________ 20238 शब्दार्थ व वगे जे० जिस से भा० भरत क्षेत्र में गा० ग्राम आ० आगार न० नगर खे० खेड क. कर्वट म०३ मडंय दो० द्रोण मुख प० पट्टन आ० आश्रम ग० गत ज० मनुष्य च० चार पगवाले ग० गौ ए. अज* २२ ख० खेचर प० पक्षिसमुदाय गा० ग्राम अ० अरण्य में प० फोरने वाले त. स प्राणी ब• बहुत प्रकार के रु. वृक्ष गु० गुच्छ गु० गुल्म ल• लता व० बल्लि ति० तृण प. पवंग ह. हरित ओ० औषधि प०१४ प्रवाल अं• अंकुर त० तृण व वनस्पति काया को वि. नाशकरेंगे प० पर्वत गि० गिरि डों० डुंगर उ. मुह पट्टणासमगयजणवयं, चउप्पयगवेलए खहयरे पक्खिसंघे, गामारण्णप्पयारनिरए, तसेयपाणे, बहुप्पगार रुक्ख गुच्छ गुम्मलयवल्लितण पव्वगहरियोसहिपवालं कुरमाइए, तणवणरसइ काइए विडसेहिंति, पव्वयगिरि डोंगरुत्थल भट्ठिमाईएय, वेयड्ढगिरिवजे विराबहिति, सलिल बिलगढ़ दुग्ग विसम णिण्णुण्णयाइंच गंगासिं धूवज्जाइं समीकरेहिति ॥ तीसेणं भंते ! समाए भरहवासस्सभूमीए केरिसए आगार भावाथ मेघ प्रचंड वायु से हणाती व तीक्ष्ण वेग से पतन होवे वैसी वर्षा करेंगे. उस से भरत क्षेत्र में ग्राम, नगर, आगर, खेड, कर्वट, मडंब, पाटण, द्रोणमुख व आश्रममें रहेहुवे मनुष्य, चतुष्पद, गाय, अजा, पक्षियों के समूह और ग्राम व अरण्य में रहनेवाले बहुत सप्राणियों बहुत प्रकार के आम्र, अशोकादि वृक्ष, चंपकादिलता, 10 नागरवेलादि वेल, सेलडी प्रमुख दूर्वादि, शल्यादि धान्य, प्रवाल पल्ला अंकूर, व तृण वगैरह वनस्पतियों पंचमांग विवाह एण्णत्ति ( भावती ) मूत्र ०४ सातवा शतकका छठा उद्दशा
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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