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दार्थ * म. वडी प० कही गो० गौतम अ० यह जं० जम्बूद्वीप जा. यावत् अ० आठ मास वी० व्यतीत होवे अ०
कितनीक क. कृष्णराजियों वी० उल्लंघाचे अ० कितनीक क. कृष्णराजियों णो नहीं वी० उल्लंघावे ए०१ यह म० घडी गो० गौतम क० कृष्णराजियों प० प्ररूपी ॥ १७ ॥ अ० है भं० भगवन् क० कृष्णराजियों
में गे गृह गे० दुकानों णो० नहीं इ० यह अर्थ स० समर्थ अ है भं० भगवन् क • कृष्णराजियों में गा० LEग्राम जा. यावत स० सन्निवेश णो नहीं इ० यह अर्थ स. समर्थ ॥ १८ ॥ अ० है भं० भगवन् क ब
गोयमा ! अयणं जंबुद्दीवे जाव अट्ठमासं वीईवएज्जा, अत्थगइए कण्हराई वीई
वएज्जा अत्थेगइए कण्हराई णो वीईवएजा, ए महालियाओ गोयमा ! कण्हराईओ ___पण्णत्ताओ ॥ १७ ॥ अत्थिणं भंते ! कण्हराईसु गेहाइवा गेहवणाइवा ? णोइणटे
समट्टे ॥ आत्थिणं भंते ! कण्हराईसु गामाइवा जाव साण्णवेसाइवा ? णोइणटेसमटे कितनी बडी कही हैं ? अहो गौतम ! कोई देव तीन चप्पटिका में इस जम्बूद्वीप की आसपास इक्कीस वक्त परिभ्रमण करे ऐसी शीघ्र दीव्य देवगति से कृष्णराजि में आठ मास तक चले तब कितनीक कृष्णराजि को अतिक्रमे और कितनीक कृष्णराजियों को अतिक्रमे नहीं. अहो गौतम ! इतनी बडी कृष्णराजिर
कहीं हैं ॥१७॥ अहो भगवन् ! इन कृष्णराजियों में गृह, दुकानों, ग्राम यावत् सन्निवेश हैं ? अहो गौतम? कइन में गृह यावर सन्निवेश नहीं हैं ॥ १८ ॥ अहो भगवन् ! कृष्णराजियों में क्या बडे २ मेघ वगैरह हैं ?
42 अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी *
*प्रकाशक राजाबहादुर लाला सुखदेवसहायजी ज्वालाप्रसादजी *