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________________ शब्दार्थ अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी देवप्रतिक्षोभ अ० अरु गोदय स० समुद्र ॥ १२॥ त तमस्काय भ० भगवन् किं. क्या पु० पृथ्वीपरि-* णाम जी० जीव परिणाम आ० अप्परिणाम पो० गुगल परिणाम गो० गौतम नो० नहीं पु० पृथ्वी परिणाम आ० अप्परिणाम जी० जीव परिणाम पो० पुद्गल परिणाम ॥ १६ ॥ त० तमस्काय भ० भगवन् ! स० सब पा. प्राण भू० भून जो० जोर स० मत्त्व पु० पृथ्वी कायपने जा. यावत् त० त्रसकाय पने .. इवा, देववूहेइवा, देवफालिहेइवा, देवपडिक्खोभेइवा, अरुणोदएइवा, समुद्दे ॥ १२॥ तमुकाएणं भंते ! किं पुढधि परिणामे, जीव परिणामे, आउपरिणामे पोग्गल परिणामे ? गोयमा ! नो पुढवि परिणामे आउपरिणामेवि, जीव परिणाभेवि, पोग्गल परिणामेवि, ॥ १३ ॥ तमुकाएणं भंते ! सव्वे पाणा भूया जीवा सत्ता पुढवीकाइयत्ताए जाव तसकाइयत्ताए उववण्णपुव्वा ? हंता गोयमा ! असई अदुवा अणंतखुत्तो। ८ देवतमिस्र ९ देव अरण्य १० देव व्यूह ११ देव फलसा १२ देव प्रतिक्षोभ व १३ अरुणोदय ॥ १२ ॥१॥ अहो भगवन् ! तमस्काय क्या पृथ्वीपरिणामवाली, पानी परिणामवाली, जीव परिणामवाली व पुद्गल परिणामवाली है ? अहो गौतम ! तमस्काय पृथ्वी परिणामवाली नहीं है अपितु पानी, जीव व पुद्गल परिणामवाली है ॥ १३ ॥ अहो भगवन् ! तमस्काय में पृथ्वीकाय यावत् त्रसकायपने सब प्राण भूत जीव व सत्व पहिले क्या उत्पन्न हुए! हां गौतम ! सब प्राण, भूत, जीव व सत्व अनेक बार व wwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwww प्रकाशक-राजावहादर लाला मुखदंवसहायजी ज्वालामसाइजा. भावार्थ el
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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