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________________ शब्दार्थ सूत्र भावार्थ कृष्ण व वर्ण से प० प्ररूना दे० देव अ० कितनेक जे० जो त० उसको प० पहिले प० देखकर ख० क्षुब्ध होत्रे अ० अथ अ० प्राप्त होने त० उस की १० पीछे सी० शीघ्र तु० त्वरित खि० शीघ्र ही बी० { व्यतिक्रान्त करे ।। ११ ।। त० तमस्काय के मं० भगवन् क० कितने ना० नाम प० कहे गो० गौतम १ ते ० तेरह ना० नाम प० कहे तं० वह ज० यथा त० तम त० तमस्काय अं० अंधकार म० महांधकार लो०) लोकांधकार लो० लोक तमिस्र दे० देवांधकार दे० देवतमिस्र दे० देवअरण्य वे० देवव्युह दे० देवफलिह दे० रिसजणणे, भीभे, उत्तासणए, परमकिण्हे वण्णेणं पण्णत्ते । देवेविणं अत्थेगइए जेणं तप्पढभयाए पासित्ताणं खब्भाएजा, अहेणं अभिसमागच्छेजा, तओ पच्छा सहिं २ तुरियं २ खिप्पामेत्र बीईएजा ॥ ११ ॥ तमुकायरसणं भंते! कइ नामधेजा पण्णत्ता ? गोयमा ! तेरस णामधेजा पण्णत्ता, तंजहा तमेइवा, तमुकाएइवा, अंधकारइवा, महंधकारइवा, लोगंधकारेइवा, लोगतमिसेइवा, देबंधकारेइवा, देवतमिसेइवा, देवरण्णेकरनेवाला, भयंकर, त्रास उत्पन्न करे वैसा व परम कृष्ण कहा है. कितनेक देव भी उस को पहिले देखकर क्षुभित होते हैं. फीर तस्काय में प्रवेश करके शीघ्र त्वरित गति से उसे उल्लंध जाते हैं। ॐ ३ ॥ ११ ॥ अहो भगवन् ! तमस्काय के कितने नाम कहे हैं ? तमस्काय के तेरह नाम अहो गौतम ! ( कहे हैं. १ तम २ तमस्काय ३ अंधकार ४ महा अंधकार ५ लोकांधकार ६ लोक तमिस्र ६ देवांधकार 4983 पंचमांग विवाह पण्णन्ति ( भगवती ) 4 4340 छठ्ठा शतक का पांचवा उद्देशा -* ८०१
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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