________________
७५३
शब्दार्थ
करण से अ० अकरण से गो. गौतम क • करण से णो० नहीं अ० अकरण से के० कैसे गो० गौतम अ० असुरकुमार को च० चार प्रकार के क० करण इ० इन सु. शुभ करण से अ. असुरकुमार क०० करण से सा० माता वै० वेदना वेव्वेदते हैं नो नहीं अ० अकरण से ए० ऐसे थ० स्थनित कुमार पु०१४ पृथ्वीकायिक क. करण से बे० वेमात्रा ( मर्यादा रहित ) वे. वेदना वे. वेदते हैं नो० नहीं अ.}oi अकरण से उ० उदारिक शरीर वाले स० सब सु० शुभ अ० अशुभ से वे बेमात्रा से दे. देवा सु० शुभ
करणओ जो अकरणओ। से केणटेणं ? गोयमा ! असुरकुमाराणं चउब्धिहे करणे पण्णत्ते, तंजहा-मणकरणे, वइकरणे, कायकरणे, कम्मकरणे, इच्चेतेणं सुभेणंकरणेणं असुरकुमारा करणओ सायं वेयणं वेदंति, नो अकरणओं एवं जाव थणियकुमारा ॥ पुढवीकाइयाणं एवामेव · पुच्छा णवरं एचएणं सुभासुभेणं : करणेणं पुढविकाइया करणओ वेमायाए वेयणं वेदंति, नो अकरणओ ॥ उरालिय सरीरा कुमार करण मे या अकरण से वेदना वेदते हैं ? अहो गौतम ! असुरकुमार को मन, वचन, काया व
कर्म यों चार शुभ करण रहे हुवे हैं इन चारों ही शुभ करण से असुर कुमार साता वेदनीय कर्म वेदते हैं.१४ 63 ऐसे ही स्थनित कुमार का जानना, पृथ्वीकायिक करण से बेमात्रा वेदना वेदते हैं सब उदारिक शरीर
वाले जीव शुभाशुभ करण से मर्यादा रहित वेदना वेदते हैं, और देवों शुभ करण से साता वेदनीय
> पंचमांग विवाह पण्णत्ति ( भगवती) सूत्र 48
8028छहा शतक का पहिला उद्देशा g
mmmmmmmmmm
भावार्थ