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________________ Page शब्दार्थ र ते० उस काल ते० उस समय में चं० चपा न० नगरी ज० जैसे ५० पहिला उ० उद्देशा त० तैसे ने० जानना ए. यह भी न० विशेष चं० चंद्रमा भा० कहना पं० पांचवा स० शतक का द० दशवा उ० उद्देशा स. संपूर्ण ॥ ५ ॥ १० ॥ पं० पांचवा स० शतक स० संपूर्ण ॥५॥ । तेणं कालेणं तेणं समएणं चंपा नामं नयरी, जहा पढमिल्लो उद्वेसओ तहा नयन्वो एसोवि नवरं चंदिमा भाणियव्वो पंचमसयस्स दसमो उद्देसो सम्मत्तो ॥५॥ १० ॥ नववे उद्देशे के अंत में देवता का आधिकार कहा. दशवे में मात्र चंद्र का प्रश्न पूछते हैं. उस काल उस समय में चंपा नाम की नगरी थी उस की ईशान कौन में पूर्ण भद्र बगीचे में श्री श्रमण भगवन्त महावीर स्वामी पधारे. और श्री गौतम स्वामी वंदना नमस्कार कर ऐसा प्रश्न पूछने लगे कि अहो भगवन् ! चंद्रमा देव कहां रहता है ? अहो गौतम ! समभूमि से आठसो योजन ऊंच चंद्र का विमान है. शेष सब अधिकार प्रथम शतक का पहिला उद्देशा जैसे कहना. अहो भगवन ! आप के वचन सत्य हैं. पांचवा शतक का दशवा उद्देशा पूर्ण हुवा ॥ ५॥ १० ॥ पांचवा शतक समाप्त ॥ ५ ॥ पंचमांग विवाह पण्णत्ति ( भगवती ) सूत्र 28805 8 पांचया शतक का दशवा उद्देशा 188 488 VBO ~
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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