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________________ शब्दाथे * नारद पुत्र ते. तहां उ० आये उ० आकर ना० नारद पुत्र अ० अनगार को एक ऐसा व. कहा स सब पो० पुद्गल अ• आर्य, किं० क्या स० अर्ध सहित स० मध्य सहित स० प्रदेश सहित उ० अथवा । अणगारे जेणेव नारयपुत्ते अणगारे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छइत्ता, नारयपुत्तं ७१६ अणगारं एवं वयासी-सव्वे पोग्गलत्ति अजो किं सअड्डा समझा सपएसा उदाहु अणड्डा अमज्झा अपएसा ? अजोत्ति नारयपुत्ते अणगारे नियंठि पुत्तं अणगारं एवं वयासी सव्वे पोग्गला मे अजो सअट्टा समझा ‘सपएसा, नो अणड्डा अमज्झा अपएसा । तएणं से नियंठिपुत्ते अणगारे नारयपुत्तं अणगारं एवं क्यासी जइण ते अजो ! सव्वे पोग्गला संअड्डा समज्झा, सपएसा, नो अणड्डा अमज्झा अपएसा; किं दव्वादेसेणंअजो! सव्व पोग्गला सअड्डा तहेव चेव, कालादेसेणं तंचेव, भावादेसेणं भावार्थ हुए विचरते थे ॥२॥ उस समय में निर्ग्रन्थी पुत्र अनगार नारदपत्र अनगार की पास आकर ऐमा बोले की अहो आर्य ! सब पुद्गलों क्या अर्ध, मध्य व प्रदेश सहित हैं अथवा अथवा अर्ध, मध्य व प्रदेश में रहित हैं ? नारद पुत्र अनगार निर्ग्रन्थी पुत्र अनगार को ऐसा बोले कि अहो आर्य ! सब पुद्गल मेरे अभिप्राय ने से अर्ध, मध्य व प्रदेश सहित हैं. उस समय में निर्ग्रन्थी पुत्र अनगारने नारद पुत्र को कहा कि अहो । आर्य ! जब तुम्हारे आभप्राय से सब पुद्गल अर्ध, मध्य व प्रदेश सहित हैं तब क्या वे द्रव्यादेश से अर्थ मध्य व प्रदेश सहित हैं, क्षेत्रादेशसे, काला देश से या भावादेश से हैं ? तब नारद पुत्रने उत्तर दिया है। 23 अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी gop * प्रकाशक-राजाबहादुर लाला मुखदेवसहायजी ज्वालाप्रसादजी *
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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