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शब्दार्थ न. यम.म० महाराजा ॥११॥क कहां भं० भगवन व० वरुण म. महाराजा का स० स्वयं जेल म०.
महाविमान गो० गौतम त उस सो• सौधर्म अवतंसक म. महाविमान की प० पश्चिम में सो० सौधर्म देवलोक में अ. असंख्यात जा. यावत् ज० जैसे सो० सोम का त० तैसे वि. विमान राज्यधानी भा० कहना जा. यावत् पा० प्रासाद अवतंसक ण. विशेष ना. नाम ना. नाना प्रकार ॥ १२ ॥ व० वरुण के जा. यावत चि० रहते हैं व० वरुण का परिवार व० वरुण के• सामानिक का परिवार मा० नाग
जमे महाराया महाराया ॥११॥ कहिणं भंते ! सक्कस्स देविंदस्स देवरण्णो वरुणस्स महारन्नो, सयंजले नामं महाविमाणे पन्नते ? गोयमा ! तस्सणं सोहम्मवडं सयस्स महाविमाणस्स पञ्चत्थिमेणं सोहम्मेकप्पे असंखेज्जाइं, जहा सोमस्स तहा विमाण रायहाणीओ भाणियव्या जाव पासाय वडंसया. णवरं नाम नाणत्तं ॥ १२ ॥
सकस्सणं वरुणरसणं जाव चिटुंति तंजहा-वरुणकाइयाइवा, वरुणदेवकाइयाइवा, पल्योपम की स्थिति कही है. इस तरह अहो गौतम ! यह महर्दिक यावत् महाराजा है.॥११॥ अहो भगवन्! शक्र देवेन्द्र के वरुण नामक महाराजा का सतंमला नामक महाविमान कहां है ? अहो गौतम ! सौधर्मावतं
सक विमान की पश्चिम में असंख्यात योजन जावे वहां वरुण महाराजा की सतजला नामक राज्यधानी कही * उसका वर्णन सोममहाराजा जैसे करना॥१२॥वरुण कायिक,वरूणदेव कायिक,नागकुमार,नागकुमारियों, उदधि ।
१४ अनुवादक-चालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी
प्रकाशक-राजाबहादुर लाला मुखदेवसहायजी ज्वालाप्रसादजी*