________________
4वि विमान ई० घोडे उ० ऊंचे. ई. थोडे उ०. उन्नत ई ईशान दे देवेन्द्र के विमान से सशक्र दे देवेन्द्र के ।
वि०किमान ई० घोडे नी नीचे गिन्युन है. हांगो गौतम स. शक का स० सर्व ने जानना से Vवह के. कैसे मो. गौतम ज. जैसे क. हथेली सि. होवे दे देश से उ० ऊंची उ. उन्नत पी. नीची नि० न्यून से०. वह ते. इसलिये ॥५०॥ १० समर्थ भ० भगवन् स० शक्र दे. देवेन्द्र ई० ईशान दे०१४
देविंदस्स देवरण्णो विमाणहितो ईसाणस्से देविंदस्स देवरको त्रिमाणा ईसिं उच्चयरा ईसिं उण्णवराचेव ; ईसाणस्सवा दोविंदस्स देवरण्णो विमाणेहिंतो सक्कस्स देविदस्स देवरण्णो विमाणा ईसि जाययराचेव, ईसिं निण्णयराचेव ? हंता गोयमा ! सकस तंचेव मन्त्र नेयम् । सेकेणष्टेणं ? गोयमा ! से जहा नामए करयले सिया देसे
उच्चे, देसे उण्णए, देसे जीए, देसे णिण्णे से तेण?णं ॥ ५० ॥ पभृणं भंते ! सके । भाषार्थ | उमर (गुण में अधिक ) है ? अथवा ईशानेन्द्र के विमान से शवेन्द्र के विमान क्या नीचे या न्युन हैं ?
१. हा गौतम ! फेन्द्र से ईशानेन्द्र के विमान ऊंचे व उजत हैं. अहो भगवन् । यह किस तरह है ? 66 अहो गौतय ! जैसे हस्त का सला क्वचित् देव से ऊंचा, क्वचित् देश से जमत, क्वचित् देश से नीचा
मचिद देश से न्या होता है वैसे ही भरे मौतम ! शकेन्द्र देवेन्द्र के विमान हैं ॥५०॥ अहो ।
पंचांग विवाह पण्णत्ति ( भगवती) सूत्र 488
1481 तीसरा शतक का पहिला उद्देशा