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अनुवादक-बालब्रह्मचारीमान श्री अमोलक ऋषिजी
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दे० देवानुप्रिय ई० इन्द्राधीन ई० इन्द्राधिष्टित इं० इन्द्राधीन क० कार्य अ. इसलिये दे. देवानमिय ता. तामली बा• बालतपस्वी ता. ताम्रलिप्ता न० नगरी की ब. वाहिर उ० ईशान कोन में नि। प्रमाण मात्र भूमि आ० देखकर सं० संलेखना झू झूसकर भ. भक्त पा० पानी प० प्रत्याख्यान कर पा० पादो गम से णिक रहा तं० उन को से० श्रेय दे० देवानुप्रिय ता० तामलि बा बालतपस्वी को ब० वलिचंचा
खलु देवाणुप्पिया ! बलिचंचारायहाणी अजिंदा अपुरोहिया, अम्हेणं देवाणुप्पिया ! इंदाहीणा, इंदाहिट्ठिया, इंदाहीण कजा, अयंचणं देवाणुप्पिया ! तामली बालतवस्सी तामलित्तीए णयरीए बहिया उत्तरपुरच्छिमे दिसीभाए नियत्तणियमंडलं आलिहित्ता संलेहणा झूसणा झासिए भत्तपाणपडियाइक्खिए पाओवगमणं निवण्णे ॥
त सयं खलु देवाणुप्पिया ! अम्हं तामाल बालतवस्सि बलिचंचाए रायहाणीए मली तपस्त्रीने ताम्रलिप्ती नगरी की बाहिर ईशान कोनमें शरीर प्रमाण क्षेत्र मंडल आलेख कर संलेखना से झूसित भक्तपान का प्रत्याख्यान करके पादोगमन अनशन किया है. इसलिये तामली तपस्वी को बलिचंचा राज्यधानी में रहनेका संकल्प कराना श्रेष्ठ है ॥ ३३ ॥ परस्पर ऐसे वार्तालाप सुनकर बलिचंचा राज्यधानी की मध्य में से नीकलकर रुचकेन्द्र नाम का उत्पात पर्वत पर आये. वहां आकर वैकेय समुद घात प्रदेश बाहिर नीकालकर उत्तर वैकेय रूप बनाये. वैकेय रूप बनाकर उत्कृष्ट, आकुलतावाली,
*प्रकाशक-राजाबहादुर लालामुखदवसहायजी ज्वालाप्रसादजी*
तावार्थ