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________________ शब्दार्थ कई व. कहा खं खंदक म मेरे ध० धर्माचार्य ध० धर्मोपदेशक स० श्रमण भं० भगवान म. महावीर उ० उत्पन्न पास शानद दर्शन युक्त अ. अरिहंत जि० जिन के केवली ती० अतीत ५० वर्तमान अ० अनागत वि० बिलामक स र्वज्ञ स० सर्वद जे० जिनने म. मुझे ए. यह अर्थ त• तुमारा र० हृदय भाव ह० शीघ्र अ० कहा ज. जिससे अ० मैं जा० जानताहूं खं० खंदक ॥ १२ ॥ त० नब खं० खंदक क० कात्यायन गोत्रीय भं० भगवान् गो. गौतम को ए. ऐमा व० बोले ग० जावे गो. गौतम से भगवं गोयम खंदयं कच्चायणसगोतं एवं वयासी एवं खल खदया ! मम धम्मायरिए धम्मोवएसए, समणे भगवं महावीरे उप्पण्णणाणदसणधेर अरहा जिणे केवली, तीय पच्चुप्पण्ण भणागय वियाणए सव्वण्णू सव्वदरिसी, जेणं ममएसअढे तवताव । रहस्सकडे हव्यमक्खाए जओणं अहं जाणामि खंदया ? ॥ १२ ॥ तरणं से खंदए कच्चायणसगोत्ते भगवं गोयमं एवं वयासी. गच्छामोणं गोयमा? तव धम्मायरियं भावार्थ धारक श्री महावीर स्वामी है. वे इन्द्रादिक के वंदनीक पूजनीक, रागादि शत्रु को जीतनेवाले. सब दोप रहित, व अतीत, अनागत व वर्तमान के ज्ञानी सर्वज्ञ, सर्वदर्शी है. इनोंने मुझे यह अर्थ तुम्हारे आये पहिले बतलाया. उन के कथनसेही मैं यह जानता हूं ॥ १२ ॥ तब स्कंदक परिव्राजक बोले की अहो गौतम ! मैं तुम्हारे धर्माचार्य धर्मोपदेशक श्री श्रमण भगवंत महा 20 अनुवादक-बालब्रह्मचारीमुनि श्री अमोलक ऋपिजी * प्रकाशक-राजाबहादुर लाला सुखदव सहायजी ज्वालाप्रसादजी *
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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