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________________ शब्दार्थ २६८ कल्याण कारी म. मंगल कारी दे देव चे. ज्ञानरूप प० पूजते इ. उस एक ऐसा अ. अर्थ कर हेतु प० प्रश्न वा० व्याकरण पु० पूछना क• करके ए. ऐसा सं० आलोचकर जे०जहां प०परिव्राजक की १० वसति ते. तहां आ० आकर ति० त्रीदंड कुं० कमंडल के रुद्राक्ष माला क. मिट्टिका भाजन भि. आसन के. चीवरखंड छ० त्रिगडी अ० अंकुश प० तांबे की मुद्रिका ग० आभरण विशेष छ. छत्र वा. पगरखा पा० पावडी धा० शाटिका गे• ग्रहणकर प० परिव्राजक व. वसाते से प० निकलकर ह० हस्त में च्छित्तए त्तिकटु एवं संपेहेइ २ त्ता, जेणेव परिव्वायगा वसही तेणव उवागच्छइ उवागच्छइत्ता तिदंडंच, कुडियंच, कंचणियंच, करोडियंच, भिसियंच, केसरियंच, छण्णालियंच, अंकुसयंच, पवित्तथंच, गणेत्तियंच, छत्तयंच, वाहणाउय पाउयाउय धाउरत्ताउयगेण्हइ गेण्हइत्ता परिव्वायगवसहीओ परिनिक्खमइ परिनिक्खमइत्ता, तिदंडं कुंडियं, कंचणियं, करोडियं, भिसियकेसारियछनालयअंकुसयपवित्तियगणेत्तिय हत्थगए, भावार्थ आकर १ त्रिदंड,२ कमंडल ३ रुद्राक्षमाला ४ मृत्तिका का भाजन ५ मृत्तिका का आमन विशेष ६ प्रमाने का कपडा ७ षड्नालिका-त्रिकाष्टिका ८ वृक्षपल्लव को छेदनेवाला अंकुश ९ ताम्बेकी मुद्रिका १० कालाचिका आभरण विशेष ११ शिरपर धारन करने का छत्र १२ पांव में पहिनने का उपानह १३१ | लकडी की चाखडी १४ गेरु से रंगे हुवे भगवे वस्त्र ऐसे भाव ग्रहण कर परिव्राजककी वसति में से नीकला, * १ अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि *प्रकाशक-राजाबहादुर लाला मुखदेवसहायजी चालाप्रसादजी*
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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