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शब्दार्थ |
निः निकले से वह के कम ए. ऐमा बु. कहा जाता है गो गैतम वा वायुकायाका च. चार स. शरीर प० प्ररूप उ. उदारिक वे वैक्रय ते. तेजन क. कार्माण उ. उदारिक वे वैकेय वि छोडकर ते. तेजस क कार्माण सहित नि निकले से वह ते. इमालये गो० गौतम एक ऐसा वु. कहाजाता है !॥ २ ॥ म०पासक भोजन करने वाला नि० निग्रंथ नो नहीं नि० कंधा हवा भ० भव नो0
विवाह पण्णत्ति ( भगवती ) सूत्र -
एवं वुच्चइ सियससरीरी निक्खमइ सियअसरीर निक्खमइ ? गोयमा ! वाउकायस्सणं चत्तारि नरीरथा प.तं. उरालिए, वेउविए, तेयए, कम्मए । उरालिय वेउवियाइं विप्पजहाय, तेय कम्मएहिं निक्खमइ. सेतेण?णं गायमा ! एवं वुच्चइ सियस
सरीरी, जीपी निक्खमइ ॥ २ ॥ मडाईणं भंते नियंठे नो निरुद्ध भवे, नो नीकलते हैं और कथंचिन शारीर रहित नीकलते हैं. अहो भगवन ! वायुकाय के जीव किस तरह से कथंचित् मा
शरी नीकलते हैं ? अहो गौतम : वायुकाय को उदारिक, वैकेय, oye तेजस और कार्माण एने पर शरीर होते हैं. उस में से उदारिक वैकेय को छोडकर नीकले इस लिये अशरीरी और तेजस, कार्माण शरीर सहित नीकले इसलिये सशरीरी, इसी से अहो गौतम : वायुकाय के जीव कथंचित् शरीर सहित नीकले और कथंचिन शरीर रहित नीकले ॥२॥ अहो भगवन !
दुसरा शतकका पहिला उद्देशा
भावार्थ