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शब्दार्थ गमो ने जानना जा. यावत् पं० पाँचदिशि में कि कैसे भं भगवन् णे० नारकी आ. श्वासले पा०
विशेष श्वासले उ० उश्वासले नि० निश्वासले तं तैसे जा. यावत् छ० छदिशा में आ० श्वासले पा० बहुत श्वासले उ० उश्वासले नि निश्वासले ए० एकेन्द्रिय जी० जीव वा० व्याघात नि० निर्व्याघात भा० कहना से० शेष नि० निश्चय छ० छदिशा में ॥ १ ॥ वा. वायुकाय भ• भगवन् वा. वायु आ० वासले पा० बहुत श्वासले उ० उश्वासले नि० निश्वासले हैं. हां गो० गौतम वा०वायुकाय जा यावत् नि०
नेयव्वो जाव पंचदिसं ॥ किण्णं भंते ! णेरइया आणमंतिवा, पाणमंतिवा, उस्ससंतिवा, निस्ससंतिवा तं चेव जाब नियमा छदिसिं आणमंतिवा, पाणमंतिवा, उस्ससंति वा निस्ससंतिवा । जीवे एगिदिया वाघाया निव्वाघाया भाणियव्वा
सेसा नियमा छदिसिं ॥१॥ वाउयाएणं भंते ! वाउयाए चेव आणमंतिवा, पाणमंतिवा, भावार्थ नरक के जीव कैसे पुद्गलों का श्वासोश्वास लेते हैं ? इस का सब अधिकार पहिले जैसे कहना यावत् निश्चय
30 ही छ दिशिका श्वासोश्वास लेते हैं. एकेन्द्रिय जीव में व्याघात निव्याघात कहना. अन्य किसी दंडक में
कहना नहीं. क्योंकी वे छ दिशिका श्वासोश्वास लेते हैं. ॥१॥ अहो भगवन् ! क्या वायुकाय श्वासोश्वास 10ग्रहण करे ? हां गौतम ! वायुकाय श्वासोश्वास लेना है. अहो भगवन् ! क्या वायुकाय के जीव अनेका।
विवाह पण्णनि ( भगवती) सूत्र
दुनरा शतक का पहिला उद्देशा
पंचमांग विवाह
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