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________________ परसोगाढे ॥ तिपदेसिएणं पुच्छा ? गोयमा ! णो कडजुम्मपदेसोगाढे, सिय तेओग पदेसोगाढे, सिय दावरजुम्मपएसोगाढे, सिय कलिओगपएसोगा, ॥ चउप्पएसिएणं पुच्छा ? गोयमा ! सिय कडजुम्मपएसोगाढे, जाब सिय कलिओगपएसोगाढे ॥ २७४६ एवं जाव अणंत पदेसिए॥ परमाणु पोग्गलाणं भंते ! किं कडजुम्मा पुच्छा ? गोयमा ! ओघादेसेणं कडजुम्मपएसोगाढा, णो तेओगा णो दावर णो कलिओगा ॥ विहाणा देसेणं णो कडजुम्मपएसोगाढा,णो तेओगाणो दावर कलिओगपएसोगाढा||दुपदेसियाणं पुच्छा ? गोयमा ! ओघादेसेणं कडजुम्मपएसोगाढा णो तेओगा, णो दावर णो द्वापर व स्यात् कलियोज प्रदेशावगाही है. तीन प्रदेशिक की पृच्छा, अहो गौतम ! कृतयुग्म प्रदेशावगाही नहीं है. परंत स्यात योज. स्यात् द्वापर व स्यात् कलि योज प्रदेशाचगाही है. चतुष्क प्रदांश पृच्छा, अहो गौतम ! स्यात् कृतयुग्म यावत् स्यात् कलियोज प्रदेशावगाही है. ऐसे ही अनंत प्रदेशिक स्कंध पर्यंत कहना. अहो भगवन् ! परमाणु पुद्गल क्या कृतयुग्म प्रदेशावगाही हैं वगैरह पृच्छा, अहो गौतम ! सामान्य से कृतयुग्म प्रदेशावगाही है परंतु योज, द्वापर व कलि युग्म प्रदेशावगाही नहीं है विधाना देश से कृतयुग्म, योज व द्वापर युग्म प्रदेशावगाही नहीं है परंतु कलि युग्म प्रदेशावगाही है. द्विपदेशिक की है। 48 अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक *प्रकाशक-राजाबहादुर लाला सुखदेवसहायजी ज्वाला प्रसादजी भावार्थ
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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