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जहा तिपदेसिया ॥ अट्ठपदेसिया जहा चउम्पदेरिया ॥ णवपदेसिया जहा परमाणु पोग्गला ॥ दसपदेसिया जहा दुषदेसिया ॥ संखेजपएसियाणं पुच्छा, गोयमा !
ओघादसेणं सिय कडजुम्मा जाव सिय कलिओगा | विहाणादेसेणं कड्जुम्मावि जाव कलिओगावि ॥ एवं असंखेजपएसियावि ॥ अणंतपएसियावि ॥ २९ ॥ परमाणु पोग्गलेण भंते ! किं कडजुम्मपएसोगाढे पुच्छा ? गोयमा ! णो कडजुम्मपएसोगाढे णो तेओए, णो दारजुम्मे कलिओगपदेसोगाढे ॥ दुपदेसिएणं पुच्छा ? गोयमा !
णो कडअम्मपएसोगाढे णो तेओए, सिय दावरजुम्मपएसौगाढं, सिय कलिओग भावार्थशिक का तीन प्रदेशिक जैसे, आठ प्रदेशिक का चार प्रदेशिक जैसे, नव प्रदेशिक का परमाणु पुद्गल पर
दश प्रदेशिक का दो प्रदेशी जैसे कहना. संख्यात प्रदेशी की पृच्छा, अहो गौतम ! मामान्य से स्यात् कृतयुग्न यावत् स्यात् कलियोज. विधाना देश से कृतयुग्न यावत् कलि युग्म ऐसे ही असंख्यात व
त प्रदेशिक का मानना ॥२. ओ.भगवन ! परमाणु पदल क्या कृतयग्र प्रदेशागाही वगैरह पृच्छा, अहो गौतम! कृतयुग्म, ध्योज व द्वापर युग्न प्रदेशावगाही नही है कलि योग प्रदशावगाही..। विदेशिक की पृच्ग, अहो गौतम ! कृतयुग व व्याज प्रदेशावनाही दिमदायक कंध नहीं है परंतु स्यात् ।
पंचमांग विवाह एण्णत्ति (भगवती) सूत्र
488 पचीसा शतक का चौथा उद्देशा 48+
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