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शब्दार्थ ए. ऐसा व० कहा आ० आत्मा णे० हमारे में सा० सामायिक आ० आत्मा णे. हमारे में सा० सामा- .
यिक का अर्य जा. यावत् वि. कायोत्सर्ग आ अर्थ त० तब से वह का: कालासरेसित पुत्र अ० अनगार थे० स्थविर भ. भगन्वत को एक ऐसा व० कहा अ० आर्य आ० आत्मा मा० सामायिक आ० आत्मा सा० सामायिक का अर्थ जा. याात् आ० आत्मा वि. कायोत्सर्ग का अर्थ अ० छोडकर
रहासंजमे ? कालासा! गरहासंजमे नो अगरहा संजमे; गरहात्रियणं सव्वं दोसं प. विणेइ सव्वं बालियं परिणाए । एवं खु णे आया संजमे उवहिए भवइ, एवंखु णेआया संजमे उवचिए भवइ, एवंखु णेआया संजमे उवट्टिए भवइ । एत्थणं से कालासवेसियपुत्त अणगारे संबुद्धे थरे भगवंते बंदइ णमंसइ वंदित्ता णमंसइत्ता
एवं वयासी-एएसिणं भंते ! पयाणं पुट्विं अण्णाणयाए, असवणयाए, अबोहियाए, भावार्थ
त्सर्ग का अर्थ कहा है. तब वह कालामवेशित पुत्र नामक अनागर बोले की अहो आर्य ! यदि तुमारे मत में आत्मा सामायिक, आत्मा सामायिक का अर्थ यावत् आत्मा कायोत्सर्ग का अर्थ है तो क्रोध, मान, माया व लोभ का त्याग कर के उसकी निन्दा क्यों करते हो ? क्यों कि निन्दा, गर्दा यह प्रद्वेष का कारन
है; और क्रोधादि त्यागने वाला सामायिक वृत्तिवाला निन्दा गही नहीं कर सकता है तब स्थविर 60 भगवंतने उत्तर दीया कि अहो कालासवाशत पुत्र ! अवद्य पापकी गहीं करते संयम होता है. तब
पुनः वह कालासबोशित अनगार बोले कि अहो भगवन् ! क्या गर्दा संयम है या अगर्दा संयम
4.9 अनुवादक-बालब्रह्मचरािमुनि श्री अमोलक ऋषिजी +
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* प्रकाशक-राजाबहादुर लाला मुखदेवसहायजी ज्वालाप्रसादनी *