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शब्दार्थ
बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी
वह ते. इसलिये गो० गौतम ए. ऐसा कुछ कहा जाता है. ॥ १८ ॥ ०. नारकी भं० भगवन् किं. क्या म. सवीर्य अ० अवीर्य गो. गौतम ने० नारकी ल. लब्धिवीर्य से स. सीर्य क० करणवीर्य से स० सीर्य अ० अवीर्य से वह के० कैसे गो० गौतम जे जिस
रकी को अ है उ० उत्थान के कर्म ब. बल वी. वीर्य पु० परुषात्कार प०पराक्रम तेल्वे ने नारकी ल० लब्धिवीर्य से स० सवीर्य क० करणवीर्य से ससवीर्य जे०जो ने नारकी को न० नहीं है उ० ___ एव वुच्चइ जीवा दुविहा प० त० सीरियावि, अवीरियावि ॥ १० ॥ नेरइयाणं है भंते किं सवीरिया अवीरिया ? गोयमा नेरइया लाद्ववीरिएणं सीरिया, करणवीरिए.
णं सवीरियाय अवीरियाय। सेकेणटेणं?गोयमा! जेसिणं नेरइयाणं आत्थि उट्ठाणे, कम्मे
चले, वीरिए पुरिसकार परक्कमे तेणं नेरइया लाई वीरिएणवि सीरिया, करणवीरिएण। गौतम ! ऐसा कहा है कि जीव वीर्य सहित व वीर्य रहित हैं ॥ १० ॥ अहो भगवनू : क्या है नरक के जीव वीर्य सहित हैं या वीर्य रहित हैं ? अहो गौतम ! नरकके जीव लब्धि वीर्य से वीर्य सहित हैं और करण वीर्य से वीर्य महित व वीर्य रहित हैं. अहो भगवन् ! किस कारन से ऐमा कहागया है ! अहो गौतम ! जिन नारकियों को उत्थान, कर्म, बल, वीर्य पुरुषात्कार व पराक्रम हैं वे नारकी लब्धि वीर्य से वीर्य सहित हैं और करण वीर्य से भी वीर्य सहित हैं. और जो नारकी उत्थानादि रहित हैं वे लब्धि
*प्रकाशक-राजबहादुर लाला सुखदेव सहायजी ज्वालाप्रसादजी *
भावार्थ