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शब्दाथे
अंदर में छ० छमास की म० मरे का० कायिकी जा. यावत् पं० पांचक्रिया पु० स्पर्श बा० बाहिर छ। छमास की म मरे च. चारक्रिया पु० स्पर्शे ॥ ७ ॥ पुं० पुरुष भं० भगवन् पु. पुरुष को स० भाला से सं. सांधे स. स्वतः के पा० हस्त से अ० असिसे सी० शीर्ष छि• छेदे त० तब से उस पु० पुरुष को क० कितनी कि क्रिया गो. गौतम जा० जब से वह पु० पुरुष तं० उस पु. पुरुष को सः
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NA8 पंचमांग विराह पण्णत्ति ( भगवती) सूत्र ११
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काइयाए जाव पंचहिं किरियाहिं पुढे : बाहिं छण्हं मासाणं मरइ, काइयाए जाव पारियावणियाए चउहि किरियाहिं पुढे ॥ ७ ॥ पुरिसेणं भंते ! पुरिसं सत्तीए समभिसंधेजा सयपाणिणावा से असिणा सीसं छिदज्जा । तओणे भंते ! से पुरिसे कइकि
8083> पहिला शतकका आठवा उद्देशा>Res
भावाये
हमारवाले को पुरुष का घेर लगता है. व जग यदि छ मान की अंदर मरजावे तो घातक पुरुष को पांच क्रियाओं लगती हैं क्यों की छ मासतक मृग को प्रहार हेतुक मरण होता है. छ मास पीछे यदि वह मृग इमरजावे तो प्राणातिपातिकी क्रिया छोडकर अन्य चार क्रियाओं लगती हैं * ॥ ७ ॥ अहो भगवन् ! कोई पुरुष शक्ति [भाला] से, अथवा अपने हस्त में रहा हुवा खग से किसी पुरुष का शिरच्छेदन करे तब
यहांपर व्यवहारकी अपेक्षासे प्राणातिपातिकी क्रिया मात्र व्यपदेश बतानेको कहीहै. अन्यथा जब प्रहारहेत्तुक मरण होवे उस समय उस वधकको कायिकी यावत् प्राणातिपातिकी पांच क्रिया लगती हैं.