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शब्दार्थ
अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी
अ.. अन्य तर स० सात म० महास्वम पा० देखकर ५० जाग्रत होती है ॥ ११॥ ३० बलदेव की माता पु० पृच्छा गो० गौतम ब० बलदेव की माता जा. यावत् च० चउदह म. महा स्वप्न में से अ० अन्यतर च. चार म० महा स्वप्न पा० देखकर प० जाग्रत होती है ॥ १२ ॥ मं० मंडलिक माता भं० भगवन् पु. पृच्छा गो. गौतम मं० मंडलिक की मा० माता जा. यावत् १० इन च. चउदह म. महास्वप्न अ० अन्यनर ए० एक म० महास्वम जा. यावत् प० जाग्रत होती हैं ॥ १३ ॥ स०
पासित्ताणं पडिबुझंति ॥ ११ ॥ बलदेवमायरो पुच्छा ? गोयमा ! बल देवमायरो जाव एएस चउद्दसण्हं महासुविणाणं अण्णयरे चत्तारि महासुविणे पासित्ताणं पडिबुझंति ॥ १२ ॥ मंडालयमायरोणं भंते ! पुच्छा, गोयमा ! मंडलियमायरो जाव एएसिं चउद्दसण्हं महासुविणाणं अण्णयरं एगं महासुविणं
जाव पडिबुझंति ॥ १३॥ समणे ' भगवं महावीरे छउमत्थकालियाए अंतिसे किसी सात स्वप्न देखती है ॥ १५ ॥ बलदेव की माता वलदेव गर्भ में आते उक्त चौदह स्वप्न में से किसी चार स्वप्न देखकर जागृत होती है ॥१२॥ मंडलिक गर्भ में आते उसकी माता उक्त चौदह स्वप्न में से किसी एक सा देवकर जगा होती है ॥१३॥ सामाधिकार में श्री श्राग भगांत महावीर स्वामीने देखे
*प्रकाशक-राजाबहादुर लाला मुखदेवसहायजी ज्वालाप्रसादजी *
भावार्थ