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शब्दार्थ
२०८९
48 पंचमाङ्ग विवाह पण्णत्ति (भगवती) मूत्र digit
20 महावीर स० श्रमण णि निर्ग्रन्थ को आ० आमंत्रण कर एक ऐसा ब० बोला जा० जो अ० आर्य गो० गोशाला पं० मंखलीपुत्र म० मेरा व० वध के लिये स० शरीर में से ते० तेज णि. नीकाला से वह अ० समर्थ ५० पूरा मो० सोलह ज० देश को अं• अंग वं० वंग म० मगध म० मलय मा० मालव अ० अच्छ व० वत्स को कोच्छ पा० पाढ ला० लाढ व० बज्री मो० मोली का० काशी को० कोशल 4 को अं• आवाध मं० भोगवाले के घा० घात के लिये व० वध के लिये उ० जलाने के लिये भा० भस्म त्ति ! समणे भगवं महावीरे समणे णिग्गंथे आमतेत्ता एवं वयासी जावइएणं अजो ! गोसालेणं मंखलिपुत्तेणं ममं वहाए सरीरंगसि तेयं णिसट्टे सेणं अलाहि पजते सोलसह जणवयाणं, तंजहा अंगाणं, वंगाणं, मगहाणं, मलगाणं, मालवगाणं,
अच्छाणं, वच्छाणं, कोच्छाणं, पाढाणं, लाढाणं, वजीणं, मोलीणं, कासीणं, कोसशीतल मृत्तिका के पानी से अपने गात्रों को सींचता हुवा रहने लगा * ॥ ११.४॥ श्रमण भगवंत महावीर स्वामी श्रमण निर्ग्रन्थों को उद्देशकर बोले कि अहो आर्यों ! मंखलीपुत्र गोशालाने मेरे वध के लिये
जो तेजो लेश्या नीकाली थी वह यदि अपने पूर्णरूप वें प्रकट होती तो १ अंग २ बंग ३ मगध ४ मलय १५ मालव ६ अच्छ ७ वच्छ ८ कोच्छ ९ पाढ १० लाढ ११ बजी १२ मोली १३ काशी १४ के
* मद्यपान पीने से व तेजोलेश्या के प्रतिघात से उक्त क्रियाओं करता है,
4880% पमरहवा शतक
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