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________________ शब्दार्थ १७६ १.१ अनुबादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषीजी क्या स० सशरीरी ३० उपजे. अ० अशरीरी २० उपजे गो० गौतम सि कदाचित् सः सशरीरी व उपजे ? * सि. कदाचित् अ० अशरीरी व उपजे से वह के० कैसे गो० गौतम ओ० उदारीक वे वैक्रेय आ० आहारक प० प्रत्यय अ० अशरीरी ते. तेजस क० कार्माण प. प्रत्यय म० सशरीरी ५० उपजे से वह ते० इसलिये ॥ ११ ॥ जी जीव भं• भगवन् ग० गर्भ में व• उपजता ५० प्रथम कं• कौनसा आ० असरीरी वक्कमइ ? गोयमा ! सिय ससरीरी बक्कमइ, सिय असरीरी वक्कमइ । सेके. गट्टेणं ? गोयमा ! ओरालिय वेउब्विय आहारयाई पडुच्च असरीरी वक्कमइ ! तैया कम्माइं पडुच्च ससरीरी वक्कमइ, से तेण?णं गोयमा ॥ ११ ॥ जीवेणं भंते ! गम्भं शरीर को होती है इसलिये शरीर का प्रश्न करते हैं. अहो भगवन् ! क्या जीव शरीरी उत्पन्न होता है ! अथवा अशरीरी उत्पन्न होता है ? अहो गौतम ! जीव क्वचिन् शरीरी उत्पन्न होता है और काचित् अशरीरी उत्पन्न होता है. अहो भगवन् ! किस कारण से ? अहो गौतम ! उदारिक वैक्रेय व आहारको इन तीनों शरीर की अपेक्षा से अशरीरी क्यों की ये तीनों शरीर एक स्थान से चयकर अन्य स्थान में उत्पन्न हुवे पीछे जीव को पाते हैं. गमन करते पार्ग में इन तीनों शरीर का अभाव है. तेजस व कार्माणई शरीर की अपेक्षा से सशरीरी उत्पन्न होते हैं क्यों कि ये दोनों शरीर जीव को संसार अवस्था में सदैव रहते हैं इसलिये ऐसा कहा गया है कि कदाचित् शरीर सहित और कदाचित् शरीर रहित उत्पन्न होना। wwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwww. * प्रकाशक-राजाबहादुर लाला मुखदेवसहा रजी ज्यालाप्रसादजी * भावार्थ
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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