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२०१४
शब्दार्थ, तब तु• तुम गो० गोशाला वे. वैश्यायन बार बालतपस्वी को, दो० दूंमरी वक्त त० तीसरी वक्त ५०.
ऐसा व० बोले कि क्या भ० तुम मु० मुनि जा. यावत् जू० यूका से० शय्यान्तर त० तब से वह वे. वैश्यायन बाबालतपस्वी तु० तुम को दो० दूसरी वक्त ततीसरी वक्त ए. ऐसा वु बोलते आ. क्रोधाय मान हुवा जा० यावत् प० पीछा जाकर स० शरीर का ते० तेज को णि नीकाला त० तब अ० मैं गो० गोशाला त• तुमारी अ० अनुकंपाके लिये वे० वैश्यायन बा० बालतपस्वी की सा० वह ते तेज प० दूर करने को अं० बीच में सी० शीतल ते. तेजो लेश्या णि निकाला जा०यावत् प० दूर की जा. जानकर
जाणइ तुसिणीए संचिट्ठइ ॥ तएणं तुमं गोसाला ! वेसियायणं वालतवस्सि दोचंवि तच्चंवि एवं व्यासी-किं मवं मुणी जाव जूयासेज्जायरए ? ॥ तएणं से वेसियायणं बालतबस्सी तुमं दोचंपि तचंपि एवं वुत्ते समाणे आसुरत्ते जाव पच्चो
सक्कइ सरीरगं तेयलेस्सं णिसिरइ ॥ तएणं अहं गोसाला ! तबअणुकंपणट्टयाए
___ वेसियायणस्स बालतवस्सिस्स सायतेय पडिसाहरणट्ठयाए एत्थणं अंतरा सीयलियं भावार्थ उस की पास गये और उन को ऐसा बोले कि तुम मुनि हो या यूकाशैय्यांतर हो. वैश्यायन बाल तपस्वीने
नुमारे इन वचनों का आदर किया नहीं यावत् अच्छे जाने नहीं और मौन रहे. वैश्यायन बालतपस्वी को 1.6दो तीन बार उक्त कथन कहने से वह आमुरक्त यावत् क्रुद्ध हुवा और आतापना भूमि में से आकर तेजो
48 अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी 88
* प्रकाशक-राजाबहादुर लाला सुखदेवसहायजी ज्वालाप्रसादजी *