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शब्दार्थ
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* अनुवादक-बालग्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋपिजी
सनिवेश जे. जां गो० गोपाल मा० माहण की मौ० गौशाला ते. बी उ० जाकर मो० गौबाबा
याहन की मो० गौशाला के ए. एक भाग में भं. पात्र निक्षेप क. करके स० मरवण म. समि देश के 70 ऊचणी.नीच म. मध्य कु. कल में घ. घर समदाण का भि. भिक्षा केलिये अ. शोधता 40 वसति स. चारों घाजु प. मार्ग ग. गोषण क. करे व० बमति की म. चारों गजु म. मार्म ग. गोषण क. करता अ. अन्यत्र व. वसति को अ० नहीं प्राप्त होने तक उस गो गोबद्दल मा० माइन की गो• गौशाला के ए० एकदेश में वा. वास उ० किया ॥ १७ ॥ त तब मा. वह भ० भद्रा भा०
माहणस्स गोसाले तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छइत्ता गोबहुलस्स माहणस्स गोसालाए एगदससि भंडाणक्खेवं करेइ, करेइत्ता सरवणे साण्णवसे उच्चणीयमाञ्झमाई कुलाई घरसमुदाणस्स भिक्खायारयाए अडमाणे वसही, सबओ समता मग्गणगवेसणं करे, वसहीए सवओ समंता मग्गणगवेसणं करेमाणे अण्णत्थ वसहिं अलभमाणे तस्सेत्र
गोबहुलस्स माहणस्स गोसालाए एगदेमंसि वासावासं उवागए॥१७॥ तएणं सा भद्दा गोशाला के एक विभाग में भंडोपकरण ख. और सावण मन्निवेश के ऊंच नीच व मध्यम कुल में घर समुदान की भीक्षा के लिये फोरनेहा वसा में मार्गपणा करने लगा. व पति में मार्ग गषणा करते अन्य स्थान नहीं मीलने से उस गोबल ब्रह्मण की गोशाला के एक विभाग में रहा.॥ १७ ॥ अब उम मादा
प्रकाशक-राजावहादुर लाला मुखदव सहायजी ज्वालाप्रसादजी।