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शब्दाथार होगा से वह त तहां अ० अर्चनीय वै० वेदनीय पू० पूजनीय सः सत्कार करने योग्य स सन्मान
करने योग्य स० सत्य स. सत्योपपात स० सनिहित पा० प्रतिहार्य ला० लीपनकीया म० पूजावाला भ०११ होगा मे० वह भ० भगवन् तक वहां से उ० चक्कर क. कहां ग• जावेगा क० कहां उ० उत्पन्न होगा गो गौतम म. महाविदेह क्षेत्र में सि० मिझेगा जा. यावत् अं०. अंत करेगा ॥ ३ ॥ ए. यह भं० भगवन् } , सा० शालवृक्ष की ल• लकडी उ० ऊष्ण से भेदाइ जा० यावत् द० दावाग्नि ज्वाला से भेदाइ का० काल
सालरुक्खत्ताए पच्चायाहिति, सेणं तत्थ - अच्चियवंदियपूईयसकारियसम्माणिय दिव्वे सच्चे सच्चोवाए सण्णिहिय पाडिहरे लाउल्लोइयमहिएयावि भविस्सइ ॥ सेणं
भंते ! तओहिंतो उव्वहित्ता कहिं गमिहिति कहिं उववाजिहिति ? गोयमा ! महाहै . विदेहे वासे सिज्झिहिइ जाव अंतंकाहिइ ॥ ३ ॥ एसणं भंते ! साललट्रिया उण्हा.
भिहया जाव दवग्गिजालाभिहया कालमासे कालं किच्चा जाव कहिं उवबजिहिति ? भावार्थ होगा और व दीव्य सत्यमेवा के फलदाता, प्रतिहार्यकर्भकरनेवाला होगा और उस की पीठिका
गोमय से लीपकर पांडु से पोतकर पूजित होवेगा. अहो भगवन् ! वह वहां से नीकलकर कहां जावेगा कहां उत्पन्न होगा ? अहो गौतम ! महाविदेह क्षेत्र में सीझेगा, बुझेगा यावत् सब दुःखों का अंत करेगा॥३॥सूर्य के ताप से यावत् दवाग्नि से हणाइ हुई उस की लकडी का जीव काल के अवसर में काल कर
पंचमाङ्ग विवाह पण्णात्त ( भगवती ) सत्र <agin
च उदहवा शतकका आठवा उद्देशान
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