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भावार्थ
8 पंचांग विवाह पण्णत्ति ( भगवती ) सूत्र
ते गोयमा ! जात्र दव्बोहिमरणे, एवंतिरिक्ख जोणिय, मणुस्स देवदव्वोहिमरणेवि । एवं एएणं गमएणं खेत्तोहिमरणेवि, कालोहिमरणेवि, भत्रोहिमरणेवि, भावोहिमरवि ॥ २५ ॥ आदितिय मरणेणं पुच्छा ? गोयमा ! पंचविहे पण्णत्ते तंजहा-दव्वादितियमरणे, खेत्तादिंतियमरणे, जाव भावादितिय मरणे ॥ २६ ॥ दवादितिय मरणणं भंते ! कइविहे पण्णत्ते ? गोयमा ! चउव्विहे पण्णत्ते, तंजहा-पोरइय { दव्यादिंतियमरणे जाव देवदव्वाइंतियमरणे ॥ २७ ॥ से केणट्टेणं भंते ! एवं वुच्चइ रइय दव्वाइंतिय मरणे ? णेरइय दव्वाइंतियमरणे गोयमा ! जंणं णेरइया रइयदव्ये
नरक में रहने वाले नारकी जिन द्रव्यों से सांप्रत में मरे उन द्रव्यों को फीर अनागत काल में मरेंगे इस { लिये अहो गौतम ! नारकी द्रव्य अवधि मरण यावत् देव द्रव्य अवधि मरण कहा गया है और इसी क्रम {से क्षेत्र, काल, भव व भाव अवधि मरण का जानना || २५ || अहो भगवन् ! आत्यंतिक मरण कितने भेद कहे हैं ? अहों गौतम ! पांच प्रकार के आत्यंतिक मरण कहे हैं. द्रव्यात्यंतिक मरण क्षेत्रात्यंतिक मरण यावत् भावात्यंतिक मरण ॥ २३ ॥ अ भगवन् ! द्रव्य आत्यंतिक मरण के कितने भेद कहे हैं.! अहो गौतम ! चार प्रकार के द्रव्य आत्यंतिक मरण. कहे हैं.. नारकी द्रव्य, आत्यंतिक यावत् देव)
4 तेरहवा शतक का सातवा उद्देशा 4098+
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