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सत्र
भावार्थ.
4 अनुवादक बालब्रह्मचारीमुनि श्री अमोलक ऋषिजी
इयत्तेचमाणा जाई दव्वाई णेरइयाउयत्ताए; एवं जहेव दव्वावीचियमरणे - तहेव खेत्तावीचियमरणेवि; एवं जाव भावावरीचिय मरणे ॥ २३ ॥ ओहि मरणेणं भंते ! कइविहे पण्णत्ते ? गोयमा ! पंचविहे पण्णत्ते तंजहा - दव्वोहिमरणे, खत्तोहिमरणे जाव भावोहिमरणे दव्वोहिमरणेणं भंते ! कइविहे पण्णत्ते ? गोयमा ! चउन्धिहे पण्णत्ते, तंजहा-णेरइयदव्वोहिमरणे जाव देवदव्बोहिमरणे ॥ २४ ॥ से केणट्टेणं भंते ! एवं gas - रइय दोहिमरणे ? गोयमा ! जंणं णेरइया णेरइयदव्वे वट्टमाणा जाई दव्वाई संपयं भर्रेति जंणं णेरइया ताई दव्बाई अणागए काले पुणोवि मरिस्संति से कहते हैं ? अहो गौतम ! नरक क्षेत्र में रहे हुवे नारकी जिन द्रव्यों को नरक के आयुष्यपने वगैरह द्रव्य आवीचिक मरण जैसे कहना. और ऐसे ही काल, भव और भार आवीचिक मरण का जानना ॥ २३ ॥ अहो भगवन् ! अवधि मरण कितने भेद कहे हैं ! अहो ! अवधि मरण के पांच भेद कहे हैं ? द्रव्य अवधि मरण के कितने भेद कहे हैं ?
द्रव्य अवधि, क्षेत्र अवधि यावत् भाव अवधि. अहो भगवन् !
अहो गौतम ! द्रव्य अवधि मरण के चार भेद कहे हैं. नारकी द्रव्य अवधि मरणं यावत् देव द्रव्य अवधि मरण ॥ २४ ॥ अहो भगवन् नारकी द्रव्य अवधि मरण किस कारन से कहा गया है ? अहो गौतम ! |
ॐ प्रकाशके राजा बहादुर लाला सुखदेवसहायजी ज्वालाप्रसादजी
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