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________________ शब्दार्थ 4मरण भ० भगवन् क कितने प्रकार का ५० प्ररूपा गो० गौतम पं० पांच प्रकार का द० द्रव्य आवी मरण खे० क्षेत्र आवीचिक मरण का काल आवीचिक मरण भ० भव आवीचिक मरण भा० व आवीचिक मरण ॥ २०॥ सरल शब्दार्थ. पंडियमरणे ॥ १९ ॥ आवीचियमरणेणं भंते ! कइबिहे पण्णत्ते गोयमा ! पंचविहे पण्णत्ते, तंजहा-दव्यावीचियमरणे, खेत्तावीचियमरणे, कालावीचियमरणे, भवावीचिय मरणे, भावावीचियमरणे ॥ २० ॥ दव्यावीचिय मरणेणं भंते ! कइविहे पण्णत्ते ? गोयमा ! चउविहे पण्णते, तंजहा-णेरइय दबावीचियमरणे, तिरिक्खजोणिय दवावीचियमरणे, मणुस्सदव्वावीचियमरणे, देवदव्यावीचियमरणे, ॥ २१ ॥ भोगते हैं वह आत्यंतिक मरण है ४ बाल मृत्यु अविरति जीव का और ५ पंडित मरण सब विरति जीव का ॥ १९ ॥ अहो भगवन् ! आवीचिक मरण के कितने भेद कहे हैं ? अहो गौतम ! आवीचिक मरण के पांच भेद कहे हैं. १ द्रव्य आवीचिक मृत्यु २ क्षेत्र आबीचिक मृत्यु, ३ काल आवीचिक मृत्यु ४ भव आवीचिक मृत्यु और ५ भाव आवीचिक मृत्यु ।। २० ॥ अहो भगवन् ! द्रव्य आवीचिक मृत्यु के में कितने भेद हैं ? अहो गौतम ! द्रव्य आवीचिक मृत्यु के चार भेद कहे हैं. नारकी द्रव्य आवीचिकन *मृत्यु, तियेच आवचिक मृत्यु, मनुष्य आवीचिक मृत्यु और देव आवीचिक मृत्यु ॥ २१ ॥ अहो भगवन्! 48 अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी + *प्रकाशक राजाबहादुर लाला मुखदवसहायजी माला प्रसादजी भावार्थ vvvvvvvvv
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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