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शब्दार्थ न भ भगन् लो० लोकान्त ५० पाछे. म. मर्यकाल ज० जैसे लो• लोकान्त में सं० जोडे स० सर्वस्थान ।
ए. ये एक ऐसे अ० अलोकान्त में सं० जोडना जा० यावत् नः सर्वकाल पु० पहिला भं० भगवन् स०
सातवा व तनुवात प० पाछे स. सातवा घ घत्वात त० तैसे न० जानना जा. यावत् स. सूत्र | भंते लोभंते पच्छा सव्वद्धा ? जहा लोयंतेणं संजोइया सव्वेठाणा । एते एवं अलो
यतेणवि संजोएयव्वा सव्वे ॥ पुद्धि भंते ! सत्तमे उवासंतरे, पच्छा सत्तेमे तणुवाए एवं सत्तमं उवासंतर सव्बेहिं समं संजोएयव्वे, जाव सव्वद्धाए । पुब्बिं भंते ! सत्त
मेतणुवाए पच्छासत्तमे घणवाए, एवं पि तहेक्नेथल्यं, जाव सव्वहा । एवं उवरिलं भावार्थ
अतीतादि काल इन सब सूत्रों को लोकान्त की साथ मीलाना. अब इम में पीछे का अद्धा समय काल की
करते हैं. अहो भगवन ! क्या पहिले लोकान्त और पीछे सर्व अद्धा अथवा पहिले सर्व अद्धा E और पीछे लोकान्त ! जैसे पहिले आकाशान्तरादिक मब स्थानक लोकान्त की साथ जोडे वैसे ही
यहां कहना. अहो भगवन् ! पहिले सातवा आकांशांतर और पीछे सातबा तनुवात अथवा पहिले सातवा तनुवात और पीछे सातवां आकाशंतर ? एसे सातवा उवासंतर की साथ सर्व अद्धा समय कालतक जोडना."
सातवा वनुवात की साथ साता घरवात का वैसे ही जानना. और इसी तरह क्रम से एकेक की साथ मनीचे का.एकेक छोडत उपर का सर्व अक्षा कक सब मोडना अजीत अनागत. अद्धा समय काल की साथ
विवाह पण्णत्ति (भगवती) सूत्र
888 पहिला शतक का छठा उद्देशा888"