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________________ - भावार्थ पंचमांग बहाव पणति (भगवती ) सूत्र काय पदेसावि ॥ केवइया जीवस्थिकाय ? अणंता, सेसं जहा धम्माथिकायस्सा२४॥ जत्थर्ण भंते ! पोग्गलास्थिकाय पदेसे ओगाढे तत्थ केवइया धम्मत्थिकाय ? एवं जहा जीवत्थिकाय पदेसे तहेव णिरवससं ॥ जत्थर्ण भंते ! दो पोग्गलत्थिकायपदेसा ओगाढा तत्थणं केवइया धम्मात्थिकाय सिय एको, सिय दोण्णि, एवं अहम्मत्थिकायस्सवि ।। एवं आगासस्थिकायस्सवि, सेसं जही धम्मस्थिकायस्स ॥ जत्थणं भंते ! तिणि पोग्गलास्थकायप्पएसा ओगाढा तस्थ केवइया धम्मत्थिकाय पदेसा ओगाढा ? जीवास्तिकाय के अनंत प्रदेश अवगाहकर रहे हैं शेष सब धर्मास्तिकाय जैसे जानना. ॥ २४ ॥ अहो भनवन् ! जहां पुद्गलास्तिकाय का प्रदेश अवगाह कर रहा हुवा है वां,कितने धर्मास्तिकाय प्रदेश अबगाह कर रहे हुवे हैं ? अहो गौतम ! जैसे जीवास्तिकाय का कहा वैसे ही यहां कहना. अहो भगवन् ! दो पुद्गलास्तिकाय के प्रदेश जहां अवगाहकर रहे हैं वहां कितने धर्मास्तिकाय के प्रदेश अवगाह कर रहते | हैं ? अहो गौतम ! क्वचित् एक बाचित् दो प्रदेश अवगाह कर रहते हैं. ऐसे ही अधर्मास्तिकाय व on आकाशास्तिकाया का जानना. शेष सब धर्मास्तिकाया जैसे कहना. अहो भगवन् ! जहां तीन पदलास्तिकाय प्रदेश अवगाह कर रहे हवे हैं वहां कितने धर्मास्तिकाय मदेश रहे हवे हैं? अहो गौतम! वचित्र एक, क्वचित् दो, व क्वचित् तीन. ऐसे ही अधर्मास्तिकाय व आकाशास्तिकाया का जानना. • नेरहवा तक का चौथा उद्देशा
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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