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तिय ; से तेणटेणं गोयमा ! तंचव जाव णो आयातिय, एवं जाव अचुयकप्पे ॥ आया भंते ! गेविजगविमाणे अण्णे गविजगविमाणे एवं जहा रयणप्पभा पुढवी तहेव एवं अणुत्तरविमाणावि, एवं ईसिप्पन्भारावि ॥ ८ ॥ आया भंते ! परमाणुपोग्गले अण्णे परमाणुपोग्गले ? एवं जहा सोहम्मे कप्पे तहा परमाणुपोग्गलेवि भाणियब्वे ॥ आया भंते! दुपदेसिए खंधे अण्णे दुपदेसिए खंधे? गोयमा! दुपदेसिए खंधे सिय आया सिय णो आया सियअवत्तव्वं, आयातियणो आयातिय, सिय आयाय सिय णोआयाय ४ सिय
आयाय अवत्तव्वं आयातिय णो आयातिय ५, सिय णो आयाय अवत्तव्वं, आयातिय णो भावार्थ अवक्तव्य है. जैसे रत्नप्रभा का कथन किया वैसे ही सातवी तमतयममा पृथ्वी तक और सौधर्म यावत् ।
अच्युत ऐसे बारह देवलोक, नव ग्रैवंयक पांच अनुत्तर विमान और ईषत्मागभार पृथ्वी तक का जानना ॥ ८॥ अहो भगवन् ! क्या सद्रूप परमाणु पुद्गल है या अन्य असद्प परमाणु पुद्गल है ? अहो गौतम ! जैसे सौधर्म देवलोक का कहा वैसे ही परमाणु पुद्गल का जानना. अहा भगवन् ! क्या आत्मा |
द्विपदेशिक स्कंध है या अन्य द्विपदेशिक स्कंध है ? अहो गौतम ! द्विपदेशिक स्कंध में छ भांगे होवे ? 17१ स्यादात्मा २ स्यादनात्मा ३ स्याद् अवक्तव्य ४ एक देश आश्री सत्तागत पर्याय दूसरा देश भाश्री
4.2 अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी ६
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प्रकाशक-राजाबहादुर लाला मुखदवसहायजी ज्वालामसादजी.
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