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________________ शब्द । - १७५९ भाव Tags पंचमांग वहााव पण्णति (भगवती) सूत्र - ते. उस काल ते०. उस समय में जा. यावत् प० ऐसा व० बोले दे. देव भं• भगवन् म० महर्दिक जा. यावत् म० महासुखी अ० अनंतर च० चवकर वि० विशगरी ना० नाग में उ० उत्पन्न होवे हे. हा खुत्तो ॥ सेवं भंते भंतेत्ति ॥ जाव विहरइ ॥ दुवालसमसयस्सय सत्तमो उद्देसो १२ सम्मत्तो ॥ १२ ॥ ७ ॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं जाव एवं वयासी-देवेणं भंते ! महिड्डीए जाव महेसक्खे क्या पहिले उत्पन्न हुवा ? हां गौतम ! अनेकवार यावत् अनंतवार पहिले उत्पन्न हुवा. ऐसे ही. सब जीवों का जानना. अहो भगवन् ! आप के वचन सत्य है. यह बारहवा शतक का सातवा उद्देशा Bसमाप्त हुवा ॥ १२॥७॥ ? सातवे उद्देशे में जीव की उत्पत्ति कही आठवे उद्देशे में उस का ही अन्य प्रकार से स्वरूप कहते हैं. उस काल उस समय में श्रमण भगवंत महातीर स्वामी को वंदना नमस्कार कर श्री गौतम स्वामी पूछने लगे कि अहो भगवन् ! महद्धिक यावत् महा ऐश्वर्यवंत देव अपना शरीर छोडकर अंतर रहित दो शरीरवाला + नागपने क्या उत्पन्न होता है ? हां गौतम ! उत्पन्न होता है. वह नाग क्या अर्चनीय, दो शरीर दो भव आश्री लिया गया है एक भव नाग का व एक भव वहां से चक्कर मनुष्य होवे सो. नाग ॐ का अर्थ हाथी व संप दोनों होते हैं. बारहवा शतकका आठया उद्देशा
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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