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________________ -80 १४७ शव्द ६० हां गो गौतम जा जितना ख० क्षेत्र जा यावत् प. प्रकाश नं. उसको भ-भगवन कि क्या पु० स्पर्शाहवा ओ० प्रकाशे जा. यावत् छ, छदिशा में एक ऐसे उ उद्योन करे त तपे प. प्रकाशे जा यावत् निःनिश्चय छ. दिशा में से वह भ भगान १० सर्व मम सर्व फु० स्पर्शता का. काल म समय में जा जितना खे० क्षेत्र फ० स्पर्श ता० उतना पु० सर्ग व. कहना है हां गो. गौतम स. मब जा. यावत् क कह । ते० र को भं० भगन् कि क्या पु० स्पर्शा फु.० स्पर्श जा. यावत् __जावइयाणं खेन्तं जाव पभासेइ तं भंते किं पुटुं ओभालेइ, जाव छहिसिं एवं उजोवेड ___ तवेइ पभासइ जाव निम्मा छदिसिं से प्रणं भते सव्वंति सब्बावति फुसमाण काल समयसि जावइयं खत्तं फुसइ तावइयं फुसमाणे पुढेत्ति बत्तव्वं सिया ? हंतागोयमा! भावार्थ अहो भगान! क्या वह क्षेत्र को स्पर्श कर प्रकाशता है या विना स्पर्श प्रकाशता है ? ऐसे ही स्पर्शकर Fउद्योत करता है या विना स्पर्श उद्योत करता है ? स्पर्शकर तपता है या विना स्पर्श तपता है ? स्पर्शकर विशेष प्रकाशता है या विना स्पर्श विशेष प्रकाशता है ? अहो गौतम ! निश्चय ही छ दिशाओं में स्पर्श कर प्रकाशता है, उद्योत करता है यावत् तपता है. भगवन् ! सब दिशि विदिशिओं में सब आताप मे ईस्पर्शन काल में जित, क्षेत्र को स्पर्शता है उतने ही क्षेत्र को क्या स्पर्शा कहना? हां गौतम! स्पर्शा कहना. अहो भगवन ! वह स्पर्शकर म्पर्शता है या बिना स्पर्श स्पर्शता है ? अहो गौतम ! छ दिशि को पंचङ्ग विवाह पम्पत्ति ( भगवती) मूत्र 188980%> पहिला शतकका छछ। उद्देशा 94 -
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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