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49 अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी
भवंति, एवं जाव, अहवा एगयओ परमाणुपोग्गले एगयओ दसपएसिएखंधे, एगयओ दो संखेज पएसियाखंधा भवंति। अहवा एगयओ परमाणुपोग्गले,एगयओ तिण्णि संखेज पएसियाखंधा भवंति अहवा एगयओ दुपदेसिएखंधे,एगयओ तिण्णि संखेज पएसियाखंधा भवंति, एवं जाव, अहवा एगयओ दसपएसिएखंधे एगयओ तिण्णि संखेज पएसिया खंधा भवंति ॥ एवं एएणं कमेणं पंचसंजोगोवि भाणियव्यो जाव णवसंजोगा ॥ दसहा कज्जमाणे एगयओ णवपरमाणुपोग्गला एगयओ संखेज पएसिएखंधे भवइ, अहवा एगयओ अट्ट परमाणुपोग्गला एगयओ दुपदेसिए एगयओ संखेज पएसिएखंधे
भवहाएवं एएणं कमेणं एकेको पूरेयव्वो जाव अहवा एगयओ दसपएसिएखधे भवइ एगयओ अथवा एक परमाणु पुद्गल तीन संख्यात प्रदेशात्मक स्कंध अथवा एक द्विपदेशात्मक स्कंध तीन संख्यातप्रदेशात्मक स्कंध यावत् एक दश प्रदेशात्मक स्कंध तीन संख्यात प्रदेशात्मक स्कंध इस तरह इस क्रम से पांच छ यावत् नव तक कहना. अब दश टुकडे करते नव परमाणु पुद्गल एक संख्यात प्रदेशी
आठ परमाणु पुद्गल एक द्विप्रदेशात्मक स्कंध एक संख्यात प्रदेशात्मक स्कंध. इस क्रम से एक दश त्मिक स्कंध नव संख्यात प्रदेशात्मक स्कंध अथवा दश संख्यात प्रदेशात्मक स्कंध. संख्यात
* प्रकाशक-राजाबहादुर लाला मुखदेवसहायजी ज्वालाप्रसादजी *
भावार्थ