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१.१ अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋपिजी
एगयओ तिपदेसिए खंधे भवइ, अहवा दो दुपदेसिया खंधा भवंति. तिहा कन्जमाणे एगयओ दो परमाणुपोग्गला, एगयओ दुरदेसिए खंधे भवइ. चउहाकज्जमाणे चत्तारि परमाणपोग्गला भवंति ॥ ३॥ पंच भंते ! परमाणु पोग्गला पुच्छा ? गोयमा ! पंच पएसिए खंधे भवइ, से भिजमाणे दुहावि, तिहावि, चउहावि, पंच. हावि कज्जइ. दुहा कजमाणे एगयओ परमाणु पोग्गल एगयओ चउपदसिए
खंधे भवइ; अहवा एगयओ दुपदेप्तिए खंधे, एगयओ तिपदेसिए खंधे भवइ; तिहा १. कजमाणे एगयओ दो परमाणु पोग्गला एगया तिपदेसिए खंधे भवइ अहवा
एगयओ परमाणु पोग्गले, एगयओ दो दुपदेसिया खंधा भवंति चउहा कज्जमाणे एगभगवन् ! चार परमाणु पुद्गल मीलने से क्या होवे ? अहो गौतम ! चार प्रदेशात्मक स्कंध होवे. उस के दो, तीन व चार विभाग हो सकते हैं. जब दो टुकडे करते हैं तब एक तीन प्रदेशात्मक स्कंध का व एक परमाणु पुद्गल का, अथवा दो २ परमाणु पुद्गलों के दो स्कंध. तीन टुकडे करने से एकर परमाणु पुद्गल के दो टुकडे और एक द्विपदेशात्मक स्कंध और चार टुकडे करने से एक २ परमाणु पुद्गलों के चार विभाग
॥३॥ अहो भगवन ! पांच परमाण मीलने से क्या होवे ? अहो गौतम ! पांच प्रदेशात्मक स्कंध होवे उस *के भेद होने से दो तीन चार व पांच टुकडे होते. यदि दो होवे तो चार प्रदेशात्मक स्कंध व एक एक
** प्रकाशक-राजाबहादुर लाला सुखदेवसहायजी यालाप्रसादजी *
भावार्थ