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________________ शब्दार्थ सूत्र भावार्थ * पंचमांग विवाह पण्णाते ( भगवती ) सूत्र | को० कौटुम्बिक पु० पुरुषों को स० वोलाये ए० ऐसे ज जैसे सि० शिवभद्र त० तैसे रा० राज्याभिषेक भा० कहना जा० यावत् अ० सिंचन कर क० करतल म० महाचल कु० कुमार को ज० जय वि० विजय से व० वधाया ए० ऐसे व० बोले भ० कहे जा० पुत्र कि० क्या दे० देवे कि० क्या प० विशेष देवे से० शेष ज० जैसे ज० जमाली त० तैसे जा० यावत् ॥ ४० ॥ त० तत्र से० वह म० महाबल [अ० अनगार घ० धर्मघोष अ० अनगार की अं० पास सा सामायिकादि च० चउदह पु० पूर्व अ० बिय पुरिसे संदावे, एवं जहा सिवभदस्स तहेव रायाभिसेओ भाणियव्वो जाव अभिसिंचाइ २ ता करयल परिमहब्बलं कुमारं जएणं विजएणं वद्धार्वेति २ ता एवं वयासी भण जाया ! किं देमो किं पयच्छामो सेसं जहा जमालिस्स तहेब जाव ॥४०॥ तएणं से महब्बले अणगारे धम्मघोसरस अणगाररस अंतिए सामाइयमाइ - भद्रकुमार के अधिकार समान राज्याभिषेक की तैयारी कराइ यावत् राज्याभिषेक करके महाबल कुमार को जय विजय शब्द से वधाये और बोले कि अहो पुत्र ! तुम कहो कि हम क्या देवे ? शेष सत्र जमालीवस् ॐ जानना ॥ ४० ॥ फीर महाबल कुमारने धर्मघोष अनगार की पास से सामायिकादि चौदह पूर्व का अध्ययन {किया, चौथभक्तादि विविध प्रकार के तप किये और बारह वर्ष साधुपना पालकर एक मास की byo 4- अग्यारवा शतकका अग्यारवा उद्देशा १६३३
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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